भारत की नारी | Bharat Ki Nari

भारत की नारी | Bharat Ki Nari Book/Pustak Pdf Free Download

पुस्तक का एक मशीनी अंश

एकधर्मनेतुम्ेपाँचाली बनाया। एकसमाजनेसर के बाल में मुँख्याये एक पुत्र ने तेरा सर काटडाला। एकराजा ने तुम्हें चुरा के ले गया । राम ने तुम्हें शंका से जलाया। सती कह कर समाज ने जलाया लड़की कह कर माता पिता आज तक तेरा दिल जलाते ही रहे ।

पिता ने तुम्हें कभी बेचा कभी दान में दिया लेनेवाला नहीं मिला तो विज्ञान ने भी तुम पर नारी अपना उद्धार खुद ही करना है। दहेज कह कर ससुराल ने जलाया औरत कहकर दुनियाँ दहेज देकर छोड़ दूंगा । एहसान ऐसा किया किमात्रु अर्थ में ही तुझे मार डाला ।

तेरे उद्धार के लिए कई आये राजा राममोहन राय, गाँधीजी चाँदीनहीं, रंग बिरंगे साडी नहीं सोचो, समझो, जागृति पाओ। खुवहीसुधारोअपना हालत भारत की नारी, बदली कहानी तेरी ।

देश को आजादी करने में संघ कार्य के साधन में घरती से अंबर तक गान सुधा बहाने में नाच में परियों जैसा जगा को सम्मोहित करने में रंगमंच पर तरह तरह के रूप धारण कर दिखाने में दुनिया भर में भारत की ताकत प्रकटित करने में समाज सेवा में खुद को सर्वसमर्पम करने में पहा शक्तियां बन के आज भी असंख्य नारी विराजमान हैं।

सूरज चंदा जैसे युग युग कलम से समाज सुधार भारत नारी फूल फलेगी। दुनिया के तो दो ही रंग है। काला और उजाला । उजाले को अपनाना है छोड़ ही देना और कभी कभी दुनिया लगती अपनी तो कभी परायी सुंदर मोहक फूल की चाह में हाथ लगेंगे

कांटे काटेछोडो चुमन भी भूलो फूल ही अपना मानो जरा उजाला ज्यादा अंधेरा जगका यही तरीका है । रात गुजारो आँख मूंद कर खोल के देखो दिन को ही भरा अंधेरा दिल में है । तो जग सारा अंधेरा सूरज, चंदा तारों का भी प्रकाश है

लेखक शिवालंका गिरिजा-Shivalanka Girija
भाषा हिन्दी
कुल पृष्ठ 26
Pdf साइज़1.1 MB
Categoryसाहित्य(Literature)

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