भागवत स्तुति संग्रह | Bhagwat Stuti Sangrah PDF In Hindi

भागवत स्तुति संग्रह – Bhagwat Stuti Sangrah Book/Pustak Pdf Free Download

पुस्तक का एक मशीनी अंश

जैसे व्यापक होनेसे आकाश परिच्छिन्न नहीं हो सकता वैसे ही ईश्वर भी परिच्छिन्न नहीं हो सकता। व्यापक पदार्थका स्वभाव ही है कि वह परिच्छिन्न न हो। ऐसी परिस्थितिमें

उस परिन्छिन्नरूपकी स्तुति करना निरर्थक ही है।(५) कदाचित् ईश्वर परिच्छिन्नरूपमें प्रकट हो भी जाय तो भी भागवतमें वर्णित श्रीकृष्णचरित्र वास्तविक है

इसमें कोई प्रमाण नहीं है। वह आदिसे अन्ततक रूपक-ही-रूपक है। यथा, कृष्णचन्द्र-कृष्णपक्षका चन्द्रमा, (कृष्णपक्षकी अष्टमीको १२ बजे उसका उदय होता ही है)।

गोपी-तारे, (रासक्रीड़ामें तारोंका चन्द्रमाके चारों ओर रहना): कालिय-भाद्रपद कृष्णपक्षमें चन्द्रमाके पास प्रकट हुआ काला मेघ, यमुना नदीके जलके समान दिखायी देनेवाला नीला आकाश,

कस-बड़ा मेघ इत्यादि। ऐसे रूपकोंको महत्त्व देना उचित नहीं है।(६) थोड़ी देरके लिये मान लिया जाय कि यह रूपक नहीं है, सचमुच ही भगवानका कृष्णरूपसे अवतार हुआ था,

तथापि भागवतमें जो न्णन मिलता है उसके सत्य होनेमें क्या प्रमाण है क्योंकि भागवतका निर्माता कोई अभ्रान्त पुरुष था इसमें कोई प्रमाण नहीं है। इसके विरुद्ध भ्रम,

प्रमाद आदि दोषोंसे युक्त हमारे सदरा संसारी पुरुष बोपदेवकी वह कृति है, ऐसे लेख उपलब्ध होते है।(७) यदि यह भी मान लिया जाय कि भागवतके रचयिता बोपदेव नहीं थे

अपितु व्यास ही हैं तो भी भागवतके कर्ता व्यास तथा ब्रहासूत्रकार वेदव्यास-कृष्णরैपायन अभिच व्यक्ति थे, इसमें कोई प्रमाण नहीं है। व्यास नामके अनेक ग्रन्थकार हुए हैं।

(८) यदि ईश्वर सगुण अवतार लेता है और मनुष्यके समान ही आचरण करता है तो मनुष्य और ईश्वरके अवतारमें भेद ही क्या रहा ? यदि ईश्वरकी स्तुति करना उचित है

तो मनुष्यकी जो न्णन मिलता है उसके सत्य होनेमें क्या प्रमाण है क्योंकि भागवतका निर्माता कोई अभ्रान्त पुरुष था इसमें कोई प्रमाण नहीं है। इसके विरुद्ध भ्रम, प्रमाद आदि दोषोंसे युक्त हमारे सदरा संसारी

लेखक Gita Press
भाषा हिन्दी
कुल पृष्ठ 641
Pdf साइज़68.5 MB
Categoryधार्मिक(Religious)

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