अमृत वचन | Amrit Vachan

अमृत वचन | Amrit Vachan Book/Pustak Pdf Free Download

पुस्तक का एक मशीनी अंश

बताये अनुसार साधन करनेसे भगवान्को प्राप्ति हो जाती है। मनुष्य-शरीर पाकर परमात्माकी प्राप्ति नहीं की तो यह मनुष्य-शरीरकी हत्या करना है। इस बातको सोचकर संसारसे वैराग्य करके जोरके

साथ साधन करना चाहिये। जो मनुष्य-शरीर पाकर विषयोंका सेवन करता है, वह अमृतको छोड़कर विषका पान करता है।संसारके विषय-भोगोंको घृणित समझकर बिलकुल त्याग देना चाहिये।

वैराग्यवान् पुरुषोंका संग, चिन्तन, स्मरण करनेसे वैराग्य उत्पन्न होता है।भगवान्ने हमें मनुष्य-जन्म दिया है, यह सोच-समझकर ही दिया है। हमको-मनुष्यमात्रको परमात्माकी प्राप्तिका अधिकार है।

परमात्माकी प्राप्तिके लिये कुछ करना-धरना नहीं है, केवल परमात्माकी प्राप्तिकी तीव्र इच्छा होनी चाहिये, अन्य सब इच्छाओंको कुचल डालना चाहिये।अब से लेकर मरणपर्यन्त नारायणकी ही रटन लगानी चाहिये,

नारायणको एक क्षण भी नहीं छोड़े। रात दिन कभी नहीं छोड़ना चाहिये। जब आपका जागृत कालमें निरन्तर भगवान्के भजनका अभ्यास हो जायगा तो सोनेके समय भी भगवान्का भजन ही होगा।

जब १८ घंटा निरन्तर भजन होगा तो रातको ६ घंटा सोनेके समय भी भजन हो होगा।हम अपनी शक्तिभर परमात्माकी प्राप्तिके लिये चेष्टा कर लेंगे तो भगवान् बड़े दयालु हैं, परमात्माकी प्राप्त हो ही जायगी )

अभीतक नहीं हुई, इसका कारण यह है कि हमने अपनी शक्तिभर परमात्माका भजन कभी नहीं किया। कैसा भी पापी-से-पापी क्यों न हो, भगवान्को शरण होनेसे तर जाता है। कैसा भी मूर्ख -से-मूर्ख हो,

भगवान्की शरण होनेसे तर जाता है। समय भी चाहे थोड़े-से-थोड़ा हो, आज ही मृत्यु हो जाय, भगवान्की शरण होनेसे उद्धार हो जाता है। मनमें कभी निराशा पैदा नहीं करनी चाहिये, हमको सब प्रकारसे भगवान्की शरण होना चाहिये।

भगवान्ने गीतामें कहा है-कैसा भी पापी क्यों न हो, जो अनन्य भावसे मुझे भजता है, वह जल्दी धर्मात्मा हो जाता है और परमशान्तिको प्राप्त हो जाता है। सत्संगके प्रभावसे भी भगवान्की प्राप्ति हो जाती है।

लेखक जयदयाल गोयनका-Jai Dayal Goenka
भाषा हिन्दी
कुल पृष्ठ 158
Pdf साइज़31.1 MB
Categoryप्रेरक(Inspirational)

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