आल्हा खंड | Alha Khand PDF In Hindi

आल्हा खंड छंद स्वरूपे – Alha Khand Book/Pustak PDF Free Download

विषय सूची

  1. संयोगिनि स्वयम्वर पृवीराज जयचंदयुद्ध
  2. करिया करके देशराज बच्छराज मरण,
  3. महोबे का प्रथम युद्ध
  4. माड़ो में ‘आल्हादिकों का चंदाई करके माड़ो
  5. नृपति को कोल्हू में पिशना…
  6. आल्हा का विवाह
  7. मलखान का विवाह
  8. ब्रह्माका विवाह उदयसिंहका विवाह
  9. चन्द्रावलि चौथि….
  10. इन्दलहरणव्याहताहीमा
  11. आल्हा निकासी
  12. लाखनि का विवाह
  13. गॉजरकी लड़ाई ..
  14. सिरसा समर मलखे मरण
  15. कीरतिसागर का मैदान
  16. आल्हा का मनावन
  17. नदी बेतवाका समर
  18. ठाकुर उदयसिंहका हरण बेलाके गौनेका प्रथम युद्ध
  19. वेलाके गौनेका द्वितीय युद्ध
  20. बेला ताहर का मैदान
  21. चन्दनबागकेर मैदान चन्दन खम्भा का मैदान

बाह्मण कायय मुसलमान औ नौकर रहे बहुत अँगरेज ॥ काम देखिए सब काहू को सोवे नवल भवन तब सेज ४ को गति बरणे तिन मुंशीके जिनको बढ़ो अमित परताप ।।

लाखन पुस्तक के ऊपरमाँ जिनके परे अलग छाप तिन सुत बाबू प्रागनरायण को गुण बरणे तिन बाबूके गाये कथा बहुत बढिजाय जिन मन शान्ति रही दर्शाय॥

लं० जिला जोन उन्नाम ताजा पूस्वदिशि माहीं। पांच कोस है ग्राम नाम पँडी तिहिकाहीं ॥ किरपाशंकर मिश्र वृत्ति पण्डित की जाहीं।

विनमुत ललिहेनाम मन्य निर्मापक आईटी ते यश वरणे अव जयचंद का लेके रामचन्द्र का नाम ।॥ प्रथम स्वयम्बर संयोगिनि का पाछे वरपे युद्ध ललाम सबकनवजियात्यहिकनउजमाँ बीचम बसे तहाँ नरपाल ।

सुमिरनी मे बंते अत्र सुनिये कनउज केर हवाल मन कपामसंग ॥ जयचँद राजा कनउज वाला को गति बरणे त्यहिमंदिरके केसरि पोतो सब मंदिर है मुवा पहाड़ी तामें के लाल ओ मैंनन के गिनती ना पले कबूतर कहुँ घुटकत है

लागि कचहरी हे जयचंद के बना सिंहासन सोने का आला सकल जगत सिरनाम।। सोईसोन सरिस त्यहिचाम ? औ छति लागि वनातन केर। चकस गड़े बुलबुलन केर २ तीतर घुमिरहे सब ओर।।

कहुँ कहूँ नाचि रहे हैं मोर ३ बारे बढ़े बढ़े तामें जड़े जवाहिर लाल ४ द्ने भर दाल तलवार ।पन्दत तोहिं सदा गणनायक जासु कृपा दुख दारिद ना”। नाशे दारिद दोष सबै उर अन्तर आतमज्ञान प्रकाशे ।

प्रकाशे आतमज्ञान जने तब दुःख सबै जगको सुखभाशै । भाशे सुखको दुख सत्य जबे ललिते न तंबे यमराजों फाँसी ?सुमिरन ॥कौरव पाण्डव दोउ दल जूझे सोई जनमे सब दुनिया में जिनकी कीरति

घर घर फेली को यश वरणे तिन क्षत्रिन के जैसे थाल्दा रणशूरन को तेसे छापा सब गुपियन हित करिके कुरुक्षेत्र मैदान ॥ आल्हा ऊदन भादि महान । छेलिके लीन जगतको छाय॥ हमरे बूत कही ना जाय २ आल्हा ऊदन दीन गड़ाय ।।

लेखक ललित प्रसाद मिश्रा-Lalit Prasad Misra
भाषा हिन्दी
कुल पृष्ठ 618
Pdf साइज़26.5 MB
Categoryकाव्य(Poetry)

आल्हा खंड – Alha Khand Book/Pustak Pdf Free Download

Leave a Comment

Your email address will not be published.