वायरस और कैंसर | Virus And Cancer Hindi PDF

वायरस और कैंसर – Virus And Cancer Book PDF Free Download

पुस्तक का एक मशीनी अंश

यह भी स्पष्ट हो गया कि पेनिसिलिन प्राणियों के लिए क्यों बिल्कुल अनिष्टकर नहीं है। लेडरबर्ग ने उस सम्बर्धन द्रव में बैक्टीरिया के ऊपर पेनिसिलिन को आक्रमण करने दिया जिसमें डॉ० वीबुल के उदाहरण का अनुसरण करते हुए उन्होंने गन्ना-शर्करा मिला रखी थी।

उन्होंने देखा कि शर्करा की उपस्थिति में बैक्टीरिया लुप्त नहीं हुए जैसा कि वे सामान्यतः करते हैं बल्कि उनकी केवल प्राकृति बदल गयी और वे भी गोलाकार हो गये जब इन गोलों को पेनिसि- लिन से हटा दिया गया तब उनमें से दण्डाकार संरचनाएँ धीरे-धीरे प्रकट हुई।

पेनिसिलिन के कार्य करने का ढंग अब स्पष्ट हो गया एक विशाल और खतरनाक समुद्र में बैक्टीरिया केवल प्रोटोप्लाज्म का एक प्रति सूक्ष्म कण है।

विनाश से इस अमूल्य प्रोटोप्लाज्म को बचाने के लिये और उसे कुछ संरचनात्मक दृढ़ता देने के लिये बैक्टीरिया ने कोशिका दीवारों को विकसित किया है।

पेनिसिलिन किसी रूप में इन दीवारों के निर्माण में हस्तक्षेप करती है और इस कारण कोशिका दीवार को बनाने वाली इकाइयाँ सम्बर्धन द्रव में एकत्र होती हैं ।

अपनी दीवारों से रहित नवसम्वरधित बैक्टीरिया वैसे ही ऊपर आ जाते हैं जैसे मंथित समुद्र में बुलबुले ।

नग्न बैंक्टीरियायी गोलक के भीतर बढ़ते हुए दबाव को, एक भौतिक क्रिया द्वारा कम करके शर्करा या लवण बैक्टीरिया की रक्षा कर सकता है।

अब यह स्पष्ट हो गया कि क्यों केवल सम्वर्धन करते हुए बैक्टीरिया को पेनिसिलिन नष्ट करता है ।

जिस बैक्टीरिया की कोशिका-दीवार पूर्ण रूप से निर्मित हो चुकी हो वह पेनिसिलिन की पहुंच के बाहर होता है।

कोशिका दीवार के निर्माण में बाधा डालकर ही पेनिसिलिन बैक्टीरिया को मार सकता है।यह भी स्पष्ट हो गया कि पेनिसिलिन प्राणियों के लिए क्यों बिल्कुल अनिष्टकर नहीं है।

लेखक कृष्णानन्द दुबे-Krishnanand Dubey
भाषा हिन्दी
कुल पृष्ठ 107
Pdf साइज़10.1 MB
Categoryस्वास्थ्य(Health)

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