सूर्य अंक | Surya Ank PDF In Hindi

सूर्य अंक – Surya Ank Book Pdf Free Download

पुस्तक का एक मशीनी अंश

४-ग्राहक-संख्या या ‘पुराना ग्राहक’ न लिखनेसे आपका नाम नये ग्राहकोमें लिख जायगा । इससे आपकी सेवामें ‘सूर्याह्न’ नयी ग्राहक-संख्यासे पहुँचेगा और पुरानी ग्राहक- संख्यासे सम्भवतः उसकी वी०पी० भी जा सकती है।

ऐसा भी हो सकता है कि उधरसे आप मनीआर्डरद्वारा रुपये भेजे और उनके यहाँ पहुँचनेके पहले ही इधरसे वी०पी० भी चली जाय ।

ऐसी स्थितिमें आपसे प्रार्थना है कि आप ची० पी० लौटाये नहीं, कृपापूर्वक प्रयत्न करके किन्हीं अन्य सज्जनको नया ग्राहक बनाकर उनका नाम पता साफ-साफ लिख भेजनेका अनुग्रह करें ।

आपके इस कृपापूर्ण सहयोगसे आपका ‘कल्याण’ व्यर्थ डाक-व्ययकी हानिसे बचेगा और आप ‘कल्याण ‘के प्रचार में सहायक वनेगे ।

५-‘सूर्याक’ परिशिष्टाह(क)के साथ सब ग्राहकों के पास रजिस्टर्ड-पोस्टसे जायगा । हमलोग शीघ्राति- शीघ्र भेजनेकी चेष्टा करेंगे तो भी सभी ग्राहकोंको भेजनेमें लगभग ४-५ सप्ताह तो लग ही सकते हैं।

ग्राहक महानुभावोंकी सेवामें विशेषाङ्क ग्राहक-संख्याके क्रमानुसार ही जायगा । इसलिये यदि कुछ देर हो जाय तो परिस्थिति समझकर कृपालु ग्राहक हमें क्षमा करेंगे ।

उनसे धैर्यपूर्वक प्रतीक्षा करनेकी प्रार्थना है । ६-आपके ‘विशेषाद्ध के लिफाफे ( या रैपर ) पर आपका जो ग्राहक-नम्बर और पता लिखा गया है, उसे आप खूब सावधानीसे नोट कर लें ।

मानव-जीवनकी सर्वतोमुखी सफलता आत्मविकासपर दी अवलम्बित है ।

धात्मविक्यसये लिये सदाचार, सत्यता, सरलता, निष्कपटता भगवत्परायणता आदि दैवी गुणोंका संग्रह और असत्य, क्रोध लोभ, लेप, हिंसा आदि आसुरी लक्षणों का त्याग ही एकमात्र थेष्ठ उपाय है।

मनुष्य- मात्रको इस सत्यसे अवगत करानेके पावन उद्देश्यसे लगभग ३० वर्ष पूर्व साधक-संघकी स्थापना की गयी थी।

मनीआर्डर अग्रिम भेजकर मैंगवा लेना चाहिये । साधक उस देनन्दिनीमें प्रतिदिन अपने नियम-पाळनका विवरण लिखते हैं। सदस्यताका कोई शुल्क नदी है सभी कल्याण-कामी स्त्री-पुरुषौको इसका सदस्य बनना चाहिये ।

लेखक Gita Press
भाषा हिन्दी
कुल पृष्ठ 431
Pdf साइज़31.8 MB
Categoryधार्मिक(Religious)

सूर्य अंक – Surya Ank Book/Pustak Pdf Free Download

Leave a Comment

Your email address will not be published.