श्री भक्तमाल | Shri Bhaktamal

श्री भक्तमाल | Shri Bhaktamal Book/Pustak Pdf Free Download

पुस्तक का एक मशीनी अंश

“मतमाल, (टीका तिलक और नामावली सहित) श्रीलयोध्या जी, प्रमोद धन कुटिया निवासी, श्रीमान सीतारामशरण भगवानप्रसाद जी विरचित ।पक। किस सुन्दर भक्तिपूर्ण प्रेमभाव के साथ यह पुस्तक छापी गई है,

मानो मोती पिरोए हैं यह इस सुन्दर पुस्तक का तीसरा भाग है जो हमें मास मुगा है इस से पीछे इसी पुस्तक के पहले दोनों भाग भी ऐसी हो मनोहरताई से छापे मिले हैं

पहले दे बागों में सत्युग, त्रेता, और द्वापर युग को भक्तों का हुप्तान्य है और इस तीसरे भाग में कलियुग मतावली प्रारम्भ हुई है। इस तृतीय माग में कलियुग के चालीस) भक्तों की कपा माई गई है ।

पहले श्री १% नामा जी कृत मूल छप्पै फिर श्री मियादास की प्रवीत टीका कवित्त, बहुत ही परिश्रम के साथ अनेक प्रतियों से शोधकर कापे हैं; और उनसे नीचे भाषा कार्तिक तिलक (टीका),

श्री रामरसर्ंगमकि जी की त से, श्री सीताराम शरणं भगवान् मसाद जी दुम्रा रचित है, जिसने इस ग्रन्य के अभिप्राय को बहुत ही सुन्दर और सरस कर दिया है

श्री अयोध्या कनकमवन निवासी परमहंस श्री ६ सीताशरण महाराज जी के शिष्य टाडा निवासी कवीश्वर पंडित श्री रामगया प्रसाद जी बेदान्ती (सोरठा) मारुति दीन दयाल, जाकी कृपा कटाक्ष ने |

प्रमठ्यो तिलकरसाल, बिना युगकर जोरितेहि॥ जिसे देखते ही सर्थ साधारय को सभी भक्ति का उपदेश और श्रद्धा हो, श्रीभक्तितुधायिन्दु स्वाद (श्री मक्तमाल) का तीसरा भाग में बहुत प्रेमियों के कर कमल में देख पड़ता है।

अपने रस के अतिरिक्त रसिक तिलककार की रसज्ञता पर रसों में भी चमत्कृत हो प्रतीत होती है; वरजु मक्तों के चरित्रों से उनके रस का विलक्षण प्रकाश कलकता है । सरलता, सुगमता, शुद्धता और सुन्दरता का कहना ही क्या है ।

लेखक सीताराम शरण-Sitaram Shran
भाषा हिन्दी
कुल पृष्ठ 689
Pdf साइज़43.8 MB
Categoryसाहित्य(Literature)

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