रक्त ध्वज नाटक | Rakt Dhvaj Natak

रक्त ध्वज नाटक | Rakt Dhvaj Natak Book/Pustak Pdf Free Download

पुस्तक का एक मशीनी अंश

सूत्रधार-पिये, आज तो में -समूह एकत्र हुआ है। दर्शकों की अपार भीड़ इनकी नामा-रस-प्रियता को प्रकट कर दी है। बाज इनके मनोरजन के लिये कौन सा नाटक दिखाया जाय ? नटो-प्राणनाथ, यह स्वाधीनता का युग है आज हजारों नवयुवक

अपनी अपनी स्स-लीला को छोड़ कर आजादी को प्राप्त करने की चेष्टा में अपने प्राणों की आहुति बढ़ा रहे हैं। इतना आनते हुए भी ये नवयुवक इस विलास में निमग्न होकर किसी स्सपूर्ण नाटक को देखने की आशा से यहां आये होंगे।

परन्तु नहीं, इनका हृदय अन्धकार से परिपूर्ण है। माता की करुण दशा को ये लोग नहीं देख सकते । अथवा इनके आमोद-प्रिय हृदय को, इनकी मधुभीनी आंखों को इतना अवसर ही नहीं मिलता कि ये अपने देश की दयनीय दशा की ओर दृष्टिपात कर सकें।

अतश्व इनके विलास प्रिय हृदय में बीरत्व का सञ्चार करने के लिये, इनके मुद्दादिलों में जिन्दादिली का बीज बोने के लिये कोई देश-भक्ति पूर्ण नाटक दिखलाइये। आज भारतीय किसानों पर दरिद्रता और पाश विकता का जो प्रहार हो रहा है,

आज भारतीय ना युवकों पर जो भीषण अत्याचार हो रहा है, श्वहलावरद्ध मारत माता की भाज करुणा पूर्ण स्थिति है. उसका करुण चित्र इन विलासी युवकों के सामने खींचिये, जिससे कि तुम्हारे मनोगत मावों का अध्ययन करने के लिये ही मैंने तुम से यह प्रश्न किया था।

परन्तु तुम स्त्रियों को इतना महत्व देकर पुरुषोंको नीचे गिरा रही हो, यह तुम्हारी भूल है। देखो अभी हाल ही में मगतसिंह सुखदेव और राजगुरु जैसे होनहार युवक मारत की आजादीके लिये हंसते २ फांसी के तम्तों पर चढ़ गये ।

आज भारत की कितनी ही महिलायें स्वातन्त्र्य-प्रेमके अप राधमें पाशविकताके पंजे में फंसकर जेलकी यावनाओ सहन कर रही हैं।

लेखक
भाषा हिन्दी
कुल पृष्ठ 66
Pdf साइज़1.8 MB
Categoryनाटक(Drama)

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