पाली व्याकरण | Pali Vyakaran

पाली व्याकरण | Pali Vyakaran Book/Pustak Pdf Free Download

पुस्तक का एक मशीनी अंश

ल, ऐ, औ पाकि में नहीं होते ।ऐ के स्थान में ए हो जाता है। जैसे-ऐरावण = एरावण, वैमानिक = वैमानिक, वैयाकरण वैयाकरण कई-कहीं ऐ का इ तथा ई भी हो जाते हैं । जैसे-प्रैरेष गीवेण्यं, लेन्पव = सिन्बब । %3D

औ के स्थान में ओ हो जाता है जैसे-औदरिक %3 ओदरिक, दीवारिक = दोवारिक । कहीं-कहीं उ मी हो जाता है । कैसे -मौतिक %3 मृत्तिका, औद्धत्य = उद्य। %3Dपालि-भाषा में ‘श’ और ‘प’ नहीं होते, केवल ‘म’ ही होता है। सम्प्रति ‘ हिन्दी तथा संस्कृत में व्यवहृत नहीं है, किन्तु मराठी में इसका अब भी प्रचलन है।

मैं पाली में व्यंजन हलन्त नहीं होते और न तो पद के अन्त में स्थित निमाहीत म् होता है। पालि में विसर्ग और रेफ भी नहीं होते। रेफ का कहीं-कहीं लोप हो जाता है और कहीं-कहीं वह हो जाता है। जैसे कर्म = कम्म, सर्व = सब्ब, तर्हि = तरहि, महाई = महारहो, आर्य = अरिय, सूर्य = मुरिष, क्रीत कीत, भार्या मरिया, पर्यादान =

परिवादान, प्रेत = बेट, समग्र = समग्र, इन्द्र इन्दो।सो पठति । २. ते पठन्ति । ३. अहं पठामि । ४, मर्य पठाम। ५. त्वं पठसि । ६. तुम्हे पठय । ७. बुद्धो हसति । ८. दारका पचन्ति । ९. अहं परसामि। १०.सो गच्छति । ११.मयं गच्छाम । १२. याचक्ो कन्दति । १३. बाणिजा पसंती । १४. रुक्खो भवति ।

(ख)१. नरो धम्म पठति । २. मनुस्सो भूपालो भवति । ३. पुरिसा गार्म गच्छन्ति । ४, मनुजो बुद्धं नमति । ५. मुरा गामे दिस्सन्ति । ६. नागो देवं नमति । ७. उरगा गामम्हा गच्छन्ति । ८. यक्वो रुक्से तिट्ठति । ९. देवा धम्मं पल्सन्ति । १०. सीहो संघं सरति । ११. गन्धन्बो दारक याचति १२, सोजा लोक चजन्ति । १३. सुनस्रो ओघे कम्पति | १४. आलोके भूपालो ठिद्ठति । १५. संघो बुद्धं सरति ।

लेखक भिक्षु धर्मरक्षित- Bhikshu Dharmarakshit
भाषा हिन्दी
कुल पृष्ठ 197
Pdf साइज़8.8 MB
Categoryसाहित्य(Literature)

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