आरती कुंजबिहारी की | Krishna Aarti Lyrics PDF in Hindi

श्री कृष्ण की आरती – Krishna Aarti Lyrics Book PDF Free Download

आरती कुंजबिहारी की

भगवान कृष्ण, यादव वंश के राजा श्री वासुदेव और मथुरा के राजा कंस की बहन श्री देवकी के पुत्र थे| श्री देवकी के विवाह के दिन आकाशवाणी हुई कि कंस को देवकी के आठवें पुत्र द्वारा मार दिया जाएग।

इसलिए कंस ने वासुदेव और देवकी को जेल में डाल दिया और उनके आठवीं संतान तक उनके सभी बच्चों को मारना शुरू कर दिय।

कृष्ण जन्माष्टमी पर भगवान कृष्ण उसी जेल में जन्मे लेकिन उस दिन भगवान् के चमत्कार फलस्वरूप श्री वासुदेव कृष्ण जी को कंस से बचाने के लिए उन्हें नंदगाँव में अपने मित्र नंद बाबा और उनकी पत्नी यशोदा को सौंप आये। भगवान कृष्ण के जन्म लेने की ख़ुशी में इस दिन कृष्ण जन्माष्टमी मनाया जाता है।

श्रीकृष्ण की आरती


आरती कुंजबिहारी की,श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
आरती कुंजबिहारी की,श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥

गले में बैजंती माला, बजावै मुरली मधुर बाला 
श्रवण में कुण्डल झलकाला,नंद के आनंद नंदलाला

गगन सम अंग कांति काली, राधिका चमक रही आली
लतन में ठाढ़े बनमाली भ्रमर सी अलक, कस्तूरी तिलक

चंद्र सी झलक, ललित छवि श्यामा प्यारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की, आरती कुंजबिहारी की…॥

कनकमय मोर मुकुट बिलसै, देवता दरसन को तरसैं।
गगन सों सुमन रासि बरसै, बजे मुरचंग,  मधुर मिरदंग ग्वालिन संग।

अतुल रति गोप कुमारी की, श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की ॥
॥ आरती कुंजबिहारी की…॥

जहां ते प्रकट भई गंगा, सकल मन हारिणि श्री गंगा।
स्मरन ते होत मोह भंगा, बसी शिव सीस।

जटा के बीच,हरै अघ कीच, चरन छवि श्रीबनवारी की

श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की ॥ ॥ आरती कुंजबिहारी की…॥

चमकती उज्ज्वल तट रेनू, बज रही वृंदावन बेनू 
चहुं दिसि गोपि ग्वाल धेनू 

हंसत मृदु मंद, चांदनी चंद, कटत भव फंद।
टेर सुन दीन दुखारी की

श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की ॥
॥ आरती कुंजबिहारी की…॥

आरती कुंजबिहारी की
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥

आरती कुंजबिहारी की
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥

लेखक
भाषा हिन्दी
कुल पृष्ठ 4
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CategoryReligious

जन्माष्टमी पूजा विधि एवं मुहूर्त

  • इस दिन सुबह जल्दी उठकर घर के मंदिर को अच्छे से साफ कर लें।
  • फिर एक साफ चौकी पर पीले रंग का वस्त्र बिछाएं और चौकी पर बाल गोपाल की प्रतिमा स्थापित करें।
  • इस दिन बाल गोपाल की अपने बेटे की तरह सेवा करें। उन्हें झूला झुलाएं।
  • लड्डू और खीर का भोग लगाएं। रात 12 बजे के करीब भगवान कृष्ण की विधि विधान पूजा करें।
  • उन्हें घी, मिश्री, माखन, खीर इत्यादि चीजों का भोग लगाएं। कृष्ण जी के जन्म की कथा सुने। उनकी आरती उतारें और अंत में प्रसाद सबको वितरित कर दें।

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