भगवान पर विश्वास | Bhagwan Par Vishwas

भगवान पर विश्वास | Bhagwan Par Vishwas Book/Pustak Pdf Free Download

पुस्तक का एक मशीनी अंश

मेरी इच्छा हुई कि मैं किसी मठ (Monastery) में ले लिया जाऊँ। यह विचार इसलिये उठा कि वहाँ रहनेसे मुझे भूलों और अपराधोंके बन जानेपर दण्ड मिलेगा और इस प्रकार मैं अपने जीवनको लौकिक

सुखोंसहित भगवत्- मार्गपर बलिदान कर दूँगा; परंतु भगवान्ने मेरी वह अभिलाषा पूरी न की; क्योंकि मठमें रहनेसे मुझे जो दण्डभोग प्राप्त हुआ, वह मेरे मनके सन्तुलनको किसी प्रकार प्रभावित न कर सका।

भगवान्के साथ निरन्तर वार्तालापके अभ्यासद्वारा अपनेको भगवत्सान्निध्यके भावमें भलीभाँति स्थिर कर लेना चाहिये। भगवान्के साथ (मानसिक) वार्तालापको छोड़कर तुच्छ एवं मूर्खताभरी बातोंको सोचना लज्जाकी बात है।

हमें अपने आत्माको भगवत्सम्बन्धी ऊँची भावनाओंके आहारद्वारा पुष्ट करना चाहिये। इससे हमें भगवद्भक्तिके परमानन्दका प्रसाद प्राप्त होगा।हमें चाहिये कि अपने भगवद्विश्वासको सजीव बनायें।

भगवान्में हमारा विश्वास कितना कम है, यही तो शोचनीय विषय है। भगवद्विश्वासको अपने आचरणका आधारस्तम्भ न बनाकर लोग मनोविनोदके लिये प्रतिदिन बदलनेवाले तुच्छ साधनोंका आश्रय लेते हैं।

भगवद्विश्वासकी साधना ही भगवान्की सच्ची आराधना है और यही हमें पूर्णताके अति निकट ले जानेके लिये पर्याप्त है ।लौकिक एवं आध्यात्मिक क्षेत्रमें हमें कुछ न रखकर सर्वस्व भगवान्को समर्पितकर देना चाहिये

और उनके प्रत्येक विधानमें सन्तोषका अनुभव करना चाहिये, चाहे वह विधान सुखके रूपमें प्रकट हो अथवा दुःखके। आत्मसमर्पण हो जानेपर विधानके सभी रूप हमारे लिये समान हो जायेंगे।

प्रार्थनामें जब हमें नीरसता, भावशून्यता अथवा शिथिलताका अनुभव हो, उस समय हमें भगवद्विश्वासकी आवश्यकता होती है, क्योंकि भगवद्विश्वासके अनुपातसे ही भगवान् हमारे प्रेमकी परीक्षा लेते हैं।

यह वही समय है जब हम समर्पणके सुन्दर एवं सफल कार्य कर सकते हैं। ऐसा एक भी कार्य बन जानेपर वह हमारी आध्यात्मिक उन्नतिको प्राय: अग्रसर करने में सहायक होता है।

लेखक हनुमान प्रसाद-Hanuman Prasad
भाषा हिन्दी
कुल पृष्ठ 64
Pdf साइज़13.1 MB
Categoryधार्मिक(Religious)

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