अक्षर कुंडली | Kundali Book PDF In Hindi

कुंडली – Akshar Kundali Book/Pustak Pdf Free Download

पुस्तक का एक मशीनी अंश

एम काली मंदिर मेरे सामने परही बिताब मे से उठकर बिगनी की सुख सिर की तरह मेरे मन-मस्सक से गुजर गयी, जिस वक्त पढ़ा कि धरती का सवाजून (सतुमन) उस समय बिसाल हिन जाता है, जब सूरज यक्ो होकर एक राशि म से दूसरी में कदम रखता है

बाज तक जो कुछ भी पड़ा था. सुना था, वह यह पा कि चाद-सूरज कभी पत्री नहीं होते। पर रो रह रहा था कि 2150 वय के बाद सूरज यत्री होठा है।

यह ईसाफाल से 388 बय पहुने मेप राधि से वत्री होकर मीन राशि में आया था और फिर 2150 वरष के बाद अब युभ रात्रि में आया है।

सन् 1985 मे 388 दय जमा दिये और फिर 2373 की गिनती में से 2150 वर्ष मगरी किये (घटाये), तो सामने 223 वय धापे सूरज यो कुभ राहि में प्रवेश किये हुए ।

और कीरो के मुताबिक सूरज जब एक राशि मे से दूसरी में बदम रखता है, तो सात सो वय संधि काल के होते हैं जो दुनिया मे भयनक बौर बर्सोकिक तदोलियो का कारण होते हैं ।

यह तो जान लिया पि इस समय हमारी दुनिया सात सो वय के सथि काल से गुजर रही है, जिसमे से 222 वर्ष गुजर चुका है सोर 477 वर्ष बाकी है।

लेकिन जो पथ दाकी है, उनकी मूरत सी होगी और कुम राशि ना स्वामी शनि, सूरज के कदमो को कैसी छूमा दीद महेगा उसनो दास्तान पडो,

हो देखा कि जा कापती हुई गणीर सभी मेरे मन मगर तक से गुडरी थी, वह सामने यताम (मूस) म यी इस रही थी ।

भाग की इस नीर की हमी भयानक भी पी, अलौकिक भी। और बह रह रही थी- ‘हुनिया के तो कई रास्ते अश्तियार करेंगे घर से रई इुकडे सादे में लिपट जायेंगे।

लेखक अमृता प्रीतम-Amruta Pritam
भाषा हिन्दी
कुल पृष्ठ 154
Pdf साइज़2.5 MB
Categoryज्योतिष(Astrology)

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