अग्नि परीक्षा | Agni Pariksha PDF In Hindi

अग्नि परीक्षा – Agni Pariksha Book/Pustak Pdf Free Download

पुस्तक का एक मशीनी अंश

प्रस्तुत ग्रन्थ का प्रणयन प्राचार्यवर ने स० २.१७ के राजनगर चतुर्मास मे किया। कलकत्ता चतुर्मास के पश्चात् अपनी दो सहस्र मील की ऐतिहासिक पदयात्रा पूर्ण कर आचार्य श्री राजनगर (राजस्थान) पहुंचे थे।

चरणो का विश्राम मस्तिष्क की यात्रा बन गया । तेरापथ द्विशताब्दी समारोह की व्यस्तता में भी भाचार्य श्री ने अग्नि-परीक्षा की रचना के लिए अनोखा समय निकाला।

प्रार्थना के पश्चात् प्राप दश-दश बजे तक रात को सघन वृक्ष की छाया में बैठकर पद्य-रचना प्रकार समय बचा-बचा कर अपने प्रस्तुत रचना सम्पन्न की ।

अन्धेरी रातो मे भी श्रापका कार्य अबाघ गति से चलता रहा। मुनिश्री सागरमलजी ‘श्रमण’ तथा दिवगत श्री सोहनलाल सेठिया इस नूतन प्रयोग में अभिन्न सहयोगी रहे।

मुनि श्री मागर मलजी की तमो-लेखकता और श्री सोहनलाल सेठिया की स्मरण-प्रखरता इस ग्रन्थ प्रणयन का इतिहास बन गई । इस ग्रन्थ प्रणयन में सेवाभावी मुनिश्री चम्पालालजी श्राचार्यवर के प्रेरणा स्रोत थे ।

मैं अपना सौभाग्य समझता हू कि प्राचार्यवर की कृतियों के साथ मेरा भी सम्बन्ध जुड़ा है । सम्पादन कार्य में बचपन से ही मेरी रुचि रही है। उसका प्रारम्भ हस्तलिखित जय ज्योति पत्रिका के सम्पादन से होता है।

उसके मासिक सम्पादन के अतिरिक्त हिन्दी और संस्कृत के अनेको विशेषाको का सम्पादन भी मैंने किया। उम्र करुणा, करति विपिन श्रति भारी, वात्मीकि श्राये वनचारी | पुत्री वाल्मीकि कह ज्ञानी, वन ग्रावन निज चरित वखानी ।

प्राचार्य श्री तुलमी अपने इस काव्य मे वियोग श्रोर करुणा को ही मुख्यता देते हैं। जैन कृया के अनुसार राम का सेनापति कृतान्तमुख अपने स्वामी की आज्ञा से सीता को रथ मे बिठाकर भोपण वन मे ले जाता है, यह कहकर कि राम वन क्रीडा के लिए गये है,

आपको भी वहा चलना है। उस सिंहनाद श्रटवी मे सेनापति और मीता के वार्तालाप मे वियोग और करुणा का वर्णन प्रारम्भ होता है । रथ के खडे होते ही चारो ओर देखकर सदिग्धता भरी आवाज मे मीता कहती है.

लेखक आचार्य तुलसी – Acharya Tulsi
भाषा हिन्दी
कुल पृष्ठ 240
Pdf साइज़ 3.9 MB
Category साहित्य(Literature)

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