अग्नि देवता | Agni Devta PDF In Hindi

अग्नि देवता मैं आदर्श पुरुष का दर्शन – Agni Devta Mai Adarsh Purush Ka Darshn Book Pdf Free Download

पुस्तक का एक मशीनी अंश

इसलिए व-उ-के प्रहणसे सब भाषाओं के संपूर्ण सार- ( बतका मइण हुआ। जय मकारके उच्चारणके स्थानका ( विचार ही शेष रहा है, इस मकारका स्थान नासिका है । नासिका स्थानका उचारण मुख बन्द करके भी होता है और चाहे तो खुला मुख रख कर भी होता है।

श्रोकारके है उच्चारणों में मकार है जो ओंकार के अंत में शामिल किया है हैं। -उ-म् इन तीन अक्षरोंसे क्रमशः ऋग्वेद, यजुर्वेद जोर सामवेद इन तीन वेदोंका अरदण होता है । श्रतः आकार संपूर्ण वेदका संक्षिप्त रूप हे ।

जिन मानों की पाद पदस्था होती है, वे इम्वेद मंत्र । जय ये मन्त्र ताल स्वरमें बालापकि साथ गाये जाते तब बेही साम कहलाते हैं । साम शब्द में’ सा-अम ‘ े दो पद हैं । सा का अर्थ ऋचा और अम का अर्थ बालाप है,

इसलिये सामका अर्थ पादबद्ध मन्त्रोंका गान ऐसा है। और जो गद्य मन्त्र होते हैं, उनका नाम जो है । जोकर से वे तीनों वेद बताये गये हैं । ऋग्वेद में जाना देवताओं के मिषसे आदर्श दिष्य पुरुपका गुण वर्णन किया गया है।

यजुर्वेद में प्रशस्त कर्म करने का उपदेश है और सामगानले उद्विश हुए मनको शान्ति प्राप्त दोती ओंकार के ” अक्षरका भाव, अकार सब अक्षरों में दि होने के कारण, आदि होना वा प्रथम बनना পर अन्तिम श्रेष्ठ अवस्थाको

प्राप्त करने का प करता र ‘मः अक्षर माननीय होने की सूचना गुप्त युक्त होता मन्त्र अब देखिये, अपने बजाके मनन के लिए हमने लिये हुए प्रथम मन्त्रका प्रारम्भ भकारसे हुआ है। यह प्रकार बताता है कि साधकोंको प्रथम स्थान प्राप्त करनेका यत्न करना चाहिए अपनी जाति में प्रथम बनना चाहिये,

लेखक दामोदर सातवलेकर-Damodar Satvalekar
भाषा हिन्दी
कुल पृष्ठ 214
Pdf साइज़11.4 MB
Categoryधार्मिक(Religious)

आदर्श पुरुष का दर्शन – Agni Devta Mai Adarsh Purush Ka Darshn Book/Pustak Pdf Free Download

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