रचनानुवाद कौमुदी – Rachnanuvad Kaumudi Book Pdf Free Download

इस पुस्तक के लेखन का उद्देश्य
(१) संस्कृत भाषा को सरल, सुबोध और सर्वप्रिय बनाना ।
(२) सस्कृत-व्याकरण की कठिनाइयो को दूर कर सुगम मार्ग-प्रदर्शन करना ।
(३) ‘संस्कृत भाषा अतिक्लिष्ट भाषा है’ इस लोकापवाद का समूल खड़न करना ।
(४) किस प्रकार से सस्कृत-भाषा से अपरिचित एक हिन्दी-भाषा जाननेवाला व्यक्ति ४ या ६ मास मे सुन्दर, स्पष्ट और शुद्ध सस्कृत लिख और बोल सकता है।
(५) सन्कृत भाषा के व्याकरण और अनुबाद-सम्बन्धी सभी अत्यावश्यक बातो को एक स्थान पर सग्रह करना तथा अनावश्यक सभी बातो का परित्याग करना।
(६) अनुवाद और वाक्य-रचना द्वारा सभी व्याकरण के नियमो का पूर्ण अभ्यास करना । व्याकरण को रटने की क्रिया को न्यूनतम करना ।
(७) सस्कृत के प्रत्ययो के द्वारा सैकडो शब्दो का स्वय निमाण करना सीखना, जिनका प्रयोग हिन्दी आदि भागोओ मे प्रचलित है।
| लेखक | कपिलदेव द्विवेदी-Kapildev Dwivedi |
| भाषा | हिन्दी |
| कुल पृष्ठ | 265 |
| Pdf साइज़ | 28.7 MB |
| Category | साहित्य(Literature) |
रचनानुवाद कौमुदी – Rachnanuvad Kaumudi Book/Pustak Pdf Free Download
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