यूपी बोर्ड कक्षा 12 जीव विज्ञान हस्तलिखित नोट्स पीडीएफ हिंदी में

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कक्षा 12 जीव विज्ञान हस्तलिखित नोट्स

प्रत्येक जीव केवल कुछ निश्चित समय तक ही जीवित रह सकता है। जीव के जन्म से उसकी प्राकृतिक मृत्यु तक का यह काल, उस जीव की जीवन अवधि को निरूपित करता है।

चित्र में कुछ जीवों की जीवन अवधि दिखाई गई है। बहुत से अन्य जीवों के चित्र प्रस्तुत किए, गए हैं। इन चित्रों को देखकर; इनके बारे में पता लगाकर दिए गए रिक्त स्थान में आपको उनकी जीवन अवधि के बारे में लिखना है। चित्र में निरूपित जीव की जीवन अवधि का परीक्षण कीजिए।

क्या यह दोनों बातें रोचक एवं कौतूहल पूर्ण नहीं हैं कि यह अवधि कम से कम एक दिन या फिर अधिक से अधिक कुछ हजार वर्ष हो सकती हैं? इन दोनों चरम सीमाओं के मध्य अधिकांश जीवित जीवों की जीवन अवधि बनी रहती है।

आप शायद इस बात पर ध्यान देंगे कि किसी जीव की जीवन अवधि का आवश्यक रूप से आकार (साइज) से संबंध नहीं है; कौआ और तोता के आकार में कोई अंतर नहीं होता, फिर भी इन दोनों के जीवन अवधि में बहुत अंतर होता है। ठीक इसी प्रकार से आम के वृक्ष की जीवन अवधि पीपल के वृक्ष की तुलना में बहुत कम होती है।

जीवन अवधि भले ही कितनी हो हो, परंतु प्रत्येक जीव की मृत्यु सुनिश्चित है।

दूसरे शब्दों में; यह कह सकते हैं कि एक कोशीय जीवों को छोड़कर कोई भी जीव अमर नहीं है। हम क्यों कहते हैं कि एक कोशीय जीव की प्राकृतिक मृत्यु नहीं होती? इस वास्तविकता को जानते हुए क्या आपको आश्चर्य नहीं होता कि हजारों वर्षों से पृथ्वी पर पादपों तथा पशु-पक्षियों की विभिन्न स्पीशीज को विशाल संख्या विद्यमान है?

जीवित जीवों में कुछ प्रक्रियाएँ अवश्य हो ऐसी हैं जिनसे यह निरंतरता सुनिश्चित होती है। हाँ, यहाँ हम जनन का उल्लेख कर रहे हैं जिसे हम निश्चित मानते हैं।

जीवों में जनन को यहाँ एक जीव विज्ञानीय प्रक्रम के रूप में परिभाषित किया गया है जिसमें एक जीव अपने समान एक छोटे से जीव (संतति) को जन्म देता है। संतति में वृद्धि होती है, उनमें परिपक्वता आती है तथा इसके बाद वह नयी संतति को जन्म देती है। इस प्रकार जन्म, वृद्धि तथा मृत्यु चक्र चलता रहता है।

जनन प्रजाति में एक पीढ़ी के बाद दूसरी पीढ़ी में निरंतरता बनाए रखती है। आप बाद में अध्याय 5 (आनुवंशिकता और विविधता के सिद्धांत) में अध्ययन करेंगे कि किस प्रकार आनुवंशिक विविधता जनन के दौरान सुमित का मशागत होती हैं।

जीव विज्ञानीय संसार में व्यापक विविधता पाई जाती है तथा प्रत्येक जीव अपने को बहुगुणित करने तथा संतति उत्पन्न करने के लिए अपनी ही विधि विकसित करता है।

जीव किस प्रकार से जनन करता है उसके वास, उसकी आंतरिक शरीर क्रिया विज्ञान तथा अन्य कई कारक सामूहिक रूप से उत्तरदायी हैं।

जनन प्रक्रिया दो प्रकार की होती है जो एक अथवा दो जीवों के बीच भागीदारी पर आधारित रहती है। जब संतति की उत्पत्ति एकल जनक द्वारा युग्मक (गैमोट) निर्माण की भागीदारी के साथ अथवा इसको अनुपस्थिति में हो तो वह जनन अलैंगिक कहलाता है।

जब दो जनक (विपरीत लिंग वाले) जनन प्रक्रिया में भाग लेते हैं तथा नर और मादा युग्मक (गैमीट) में युग्मन होता है तो यह लैंगिक जनन कहलाता है।

अलैंगिक जनन

इस विधि में एकल जीव (जनन) सतति उत्पन्न करने की क्षमता रखता है। इसके परिणामस्वरूप जो संतति उत्पन्न होती है; वह केवल एक दूसरे के समरूप हो नहीं. बल्कि अपने जनक के एकदम समान होती है। क्या यह संतति आनुवंशिक रूप से भी एक समान अथवा भिन्न होती है? अकारिकीय तथा आनुवंशिक रूप से एक समान जोवॉ के लिए.

फंजाई जगत के सदस्य तथा साधारण पादप जैसे शैवाल विशेष अलैंगिक जननीय संरचनाओं द्वारा जनन करते हैं। इन संरचनाओं में अत्यंत ही सामान्य संरचनाएँ अलैंगिक चलवा (जू स्पोर्स) हैं जो सामान्यतः सूक्ष्मदर्शीय चलनशील संरचनाएँ होती है।

अन्य सामान्य अलैंगिक जनन संरचनाएँ कोनिडिया (पैनीसिलम), कलिका (हाइड्रा तथा जैम्यूल (स्पंज होते हैं।

कक्षा 11 में आपने पादपों के कायिक जनन के बारे में अवश्य ज्ञान प्राप्त किया होगा। आपका क्या विचार है कि काविक जनन भी एक प्रकार का अलैंगिक जनन है?

आप ऐसा क्यों सोचते हैं? क्या क्लोन शब्द कायिक जनन से उत्पन्न संतति के लिए उपयोज्य है।

जबकि जंतुओं तथा अन्य साधारण जीवों में अलैंगिक शब्द का प्रयोग स्पष्ट रूप से तथा पादपों में इस शब्द का प्रयोग निरंतर किया जाता है। पादपों में कायिक प्रवर्धन की इकाई |

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भाषा हिन्दी
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CategoryEducation
Source/Creditsdrive.google.com

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