सतपंथ नित्य प्रार्थना पाठ | Satpanth Nitya Prarthana Path

सतपंथ नित्य प्रार्थना पाठ | Satpanth Nitya Prarthana Path Book/Pustak Pdf Free Download

पुस्तक का एक मशीनी अंश

आद्य विष्णु निरंजन निष्कलंकी नारायण आपकी आशीष से… हरिचंद्र, चतुर वेदी ब्रह्मा, मोक्ष दातार देव महेश्वर और सहदेव तपेश्वर कलश किरतार। चारों युगों के जीवों का उद्धार किया ।

पांच, सात नौ बार, तेतीस कोटि के मिलाप दिया। आप हरिवंश पात्र स्वामीजी भाव भक्ति सिद्ध करें। थाल, प्रसाद, निशानी, आतिथ्य, दशांश, सुक्तित दाम-दोकडा, पान, फुल, फल, अन्न-जल, सब्जी, फसल, भक्ति, उपासना को मान्य रखा।

स्वामी आप पर बलिहारी जाउ । देव हमको आपकी आशा है । अक्षय पात्र अखुट कर दो । स्वामी आप 1. गत गंगा को उज्जवल कर दो। अन्नपूर्णा अन्न भरो। गणेशजी जल भरी । रिद्धि सिद्धि प्रदान करो ।

माता भवानी, महादेव स्वामी भोजन परोसे माता भवानी गये ब्रह्माजी के पास । रिद्धि सिद्धि प्रदान करो हम हे दास । हमारे भंडार भरपुर करो । मुखी बनो । अन्नदेव पूर्ण जालंधर मुखी ॥

आद्य विष्णु निरंजन निश्कलंकी नारायण आपकी आशिषसे…. स्वामी आप सृष्टि के सर्जनहार । थाल आतिथ्य आपके | भाव-सुभाव से, आपके निमित्त से, आपके भोजनालय में स्वीकार करो ।

अन्न-जल का आहार, पान फूल के भोक्ता, | सकल-संघ पर दयाकी दृष्टि रखो । आपका तेज प्रगट करो । सेवक के उपर दया की दृष्टि रखो । अनंत जीव तप करके आयें । असा बेद देव लोग प्रस्तुत कर रहे है।

सदगुरुने स्नेह किया । वह चतुर वेदी ब्रह्मा । स्वामी ! हक के दाने सेवामें लायें । जाकी दाना, उद्यम करके प्राप्त किया। सच्चाई से लाना। प्रेम से पकाना ! संन्यासी ग्रहण करें, बह्मर्पण करके ग्रहण करें । स्वामी ! आपको अर्पण करें ।

लेखक नानकदासजी महाराज-Nankdasji Maharaj
भाषा हिन्दी
कुल पृष्ठ 46
Pdf साइज़5.9 MB
Categoryसाहित्य(Literature)

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