सामवेद का सुबोध भाष्य | Samved Ka Subodh Bhashya PDF

सामवेद का सुबोध भाष्य | Samved Ka Subodh Bhashya Book/Pustak Pdf Free Download

पुस्तक का एक मशीनी अंश

सामवेदके प्रथम काण्ड ‘ भाग्य काण्ड में ११४ मंत्र है, यद्याप इनमें कहीं कहीं दूसरे देवताओं के भी मंत्र है, पर इस काण्डका मुख्य देकता ‘ अभि ‘ है । कोग देवताओं का वर्णन पढे, पढकर उनके गुणों को अपने अन्दर धारण करें,

धारण करके उन्हें बढावें और मनुष्यसे ‘ देव ‘ बनें इसके लिए वैदिक उपासना और स्तुति है। देव यना की इच्छा प्रत्येक स्तुति करनेवाले के मनमें होनी चाहिए । मैं देवताकी स्तुति करता हूं मैं इस देवताके गुणका वर्णन करता हूं,

इसका उद्देश्य है कि इस देवताके गुण मेरे अन्दर आयें, और इन छुम गुणोंसे में युक्त हो।यत् देवाः अकुर्वन् तत् करवाणि । शतपथ ग्राद्मण । * जो देव ने किया, वह में क’। इस प्रकार करके मनुष्य देवरको प्राप्त करें और देव

बनकर समाजमें शोमिस हो इसी- को भाग्नेय काण्डमें इस प्रकार परदा है,देव-युं जनं आ अयः । . ५९१, साम, १३ .’दे अपे । देवस्व प्राप्त करनेकी इच्छा करनेवाले मनुष्योंकी त प्राप्त हो तुझे प्राप्त करनेका अर्थ है उपासको देवलकी प्राप्ति,

अर्थात् उसका उदार 1 यद देवन परह्र अरना है, इस्ी- के मुख्य रूपसे करने के लिए बेदने कहा है, उसे वैदिक धर्मि मॉंको करना चाहिए ।आज हम खामवेदके’ आप्रेय णड’का विवेषन करते हैं इस काण्डका मुख्य प्रतिपाय देव्ता अत्रि है।

इस आारण सर्व प्रथम प्रिके खरूप पर विचार करते हैं अग्निके गुण इस आग्नेय काण्डमें निम्न गुणों का वर्णन है १ विश्व-वेदाः- (विश्व) सवसो (बेदाः) कामने बाला, सर्वज्ञानी, विशेषज्ञान युक्त (मं. ३) एव धन युज यह भी इस शन्दका अर्थ है,

क्योंकि वेद धनको भी कहते हैं ।वेदस् इति धन नाम यना की इच्छा प्रत्येक स्तुति करनेवाले के मनमें होनी चाहिए । मैं देवताकी स्तुति करता हूं मैं इस देवताके गुणका वर्णन करता हूं, इसका उद्देश्य है कि

लेखक दामोदर सातवलेकर-Damodar Satwalekar
भाषा हिन्दी
कुल पृष्ठ 633
Pdf साइज़37.8 MB
CategoryReligious

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