गीतमाला हिंदी भजन | Hindi Hymn Book

गीतमाला हिंदी भजन | Hindi Hymn Book/Pustak Pdf Free Download

पुस्तक का एक मशीनी अंश

डगर डगर ढूंढता है धाबे सुधि नन्दनके तुम कुछ जानी • सबकी से पूछ विक्षपानी। पातुर तब मन्दिर बहुरी तार चीदिश हैरि समाजी। बड़े बड़े ज्रानिनके संगीत मातु पितापर कोने कारण शोक विपति तुम ऐसा पानी।

प्रभु तव सादर उत्तर दोन्ही माता सुनि बैन बखानी।। काज करण पितुके माहि चहिये ओलग तुम यह मर्म न बानी। चेतहि जा सुनि यह उपदेशा जान अधम साई सदच्चानी बाद करत सुत पात्र चपानी

सब चित में खेहु समाई ॥ नगरन धूम मचाई । मृतक बहुत जिला ॥१ बधिरण दोन्ह सुनाई । टूकन ढेर उठाई ॥ २ : बयार सवाई। प्रभुजी लेहु बचाई ॥ ३ सब दुःख दीन्ह भगाई । जगमें १० नाम चलाई ॥

खल मानुष जासु दया सुधरे ॥ : निज हाथों रेगिन शेक रे। तबही मनमा प्रभु तासु भरे ॥ १ मुख देवनको निज हाथ धरे । मत सूरज है। जग क उतर ॥२ जिहि कारण से नर लेग त रे । इम आत है। वजुधा सुम र ॥

मसीह अस टेर सुनाई द्वादश शिष्य प्रभु संग लिवाये : बात कहत अग्धांगि जहागा : कोदिनका प्रभु चंगा कीन्हा : पाँच सहस्र पाँचहि रोटी: एक समय प्रभु नौका बैब्यो चेसे सब घबरावत बोले : ठाढ़े है।

प्रभु हांक पुकारी : ऐसे काम प्रभु प्रगिणित कीन्हा:हम योग कथा प्रचार करें तन ले प्रभु दीनन नाथ फिरा विधवा बिन्ती जब कान सुने : प्रभु कोढ़िन चंग अपावन : तम बामिन पै अम कौन्ह मया : दुःख संकट येशु अपार महा :

नित रणदिना प्रभु यीशु दया तारक यौश अपार दयानिधि बालक धर्म जतायो । जगकतर्त्ता नर काया धरिके यूमफ टहल बजाया । ले बालक तन सरल सुभावे -नित सत भक्ति पुरायो । डादश बरस तरुण मन्दिरमा जानिन गर्व निवायीं ।

लेखक जॉन मॉर्टन-John Morton
भाषा हिन्दी
कुल पृष्ठ 119
Pdf साइज़3.7 MB
Categoryकाव्य(Poetry)

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