
बिस्मिल्लाहिर्रहमानिरहिम
शरू अल्लाह के नाम से जो सब पर मेहेरबान हे, निहायत रहम वाला.
तआरूक- सुरे फातिहा मक्की है, नीर इसमे ७ आयते हे, और एक रूकु है.
सूरे फातिहा कुरान करीम की जो अभी तरतीब हे उसमे सबसे पेहली सूरत हे. बल्के ये वो सुरत हे जो मुकम्मल तौर पर नाजिल हूवी. इससे पेहले कोयी सूरत पुरी नाजिल नही हुवी थी. बल्के बाज़ सुरतो की कुछ आयते आयी थी. इस सुरत को पेहले रखने का मकसद बजाहिर ये हे के जो शख्स कुरान से हिदायत हासिल करना चाहता हो.
उसे सबसे पेहले अपने खालिक व मालिक की शिफात का एतेराफ (मानते हुवे) उसका शुकर अदा करना चाहिये. और एक हकके तलब करने वाले की तरह उसीसे हिदायत मांगनी चाहिये.
चुनाचे इसमे बंदो को वो दुवा सिखाई गयी हे जो एक हक के तलब करने वाले को अल्लाह से मांगनी चाहिये. यानी सीधे रास्ते की दुवा. इस तरह इस सुरत मे सिराते मुसतकीम या सीधे रासते की जो दुवा मांगी गई है. पुरा कुरान उसकी तशरीह हे के वो सीधा रस्ता कया हे?
तर्जुमा- नोट – आयत
तमाम तारीफे अल्लाह की हे जो तमाम जहानो का परवरदिगार हे. अगर आप किसी ईमारत की तारीफ करे तो दर हकीकत वो इसके बनाने वाले की तारीफ होती हे, लीहाजा इस कायनात मे जिस किसी चीज़ की तारीफ की जाये वो हकीकत मे अल्लाह ही की तारीफ है, क्युके वो चीज़ अल्लाह की बनायी हुयी है, तमाम जहानो का परवरदिगार केहकर इसी की तरफ इशारा किया गया हे के इन्सानो का जहान हो, या जानवरो का, जमादात (जंगल, पहाड, रेगीस्तान) का जहान हो, या न्बातात का, आसमानो का जहान हो या सितारो सय्यारो (planets) और फरीशतो का, सब की पेदाइश और परवरीश अल्लाह ही का काम है, और इन सब जहानो मे जो कोयी भी चीज़ तारीफ के काबिल हे तो वो अल्लाह की पेदाईश और परवरिश की शान की वजाह से हे.
जो सब पर मेहेरबान हे, बोहोत मेहेरबान हे. अरबी के कायदे से रहमान के माना हे वो जात जिसकी रहमत बोहोत वसी (Extensive) हो.
| Language | Hindi |
| No. of Pages | – |
| PDF Size | 50 MB |
| Category | Islamic PDF |
| Source/Credits | – |