युवा ज्योति | Yuva Jyoti

युवा ज्योति | Yuva Jyoti Book/Pustak Pdf Free Download

पुस्तक का एक मशीनी अंश

तो पारीमति सम्बन्धी ‘शक्तिमयों’ से चमकर मेरो अभिन्य प्रकाशन-यात्रा लोकरात्ति सम्बन्धी प्रयोगारमक महाकाव्य सौकायन’ सर पहुंची ही थी कि उन कराव्यचेत ना प्ररित राशनों

अतिरिक्त इस गुवाशक्ति सम्बन्धी ‘दुषाज्यीडि’ का प्रकायन भी अनिपार्व पर्त्य प्रतीत हुआ। अनः पैनकन प्रकारेण इशा प्रकाशन हो रहा है। अत्यन्त सीमित साधनों के ही कहार ग इस की पूष्ठसंग्रपा भी अर्यन्त मीमित हो गई।

अन्थ गाव्पहति का प्रकाशन बी कर्तच्योत्रित अनिवायत म्नीच होता है। पल्तु साफे हेतु साधन सुलभ होने पर ट्ी गो प्रकायन सम्पव होसा । किन्तु अपने जसको भी म्यूनद् पृष्ठसंक्या इसनो मो होगी ही।

जावायाची स्वभाव के कारग में निराना नहीं मिल करगा। श्रीमती चन्द्रावती पाण्डेय की प्रबल आकाक्षा पी कि में सरकार के समक्ष मुझ नहीं बीर भारतीय गारी समाज के सम्बन्ध में भी कविवाएं लि।

उनके जीवनकाल में तो यह लेखन सम्भव न हो गका, परसु इधर में स्वयं को सरकारी पद से इस्चम मुक्त कराकर फरमशঃ एस रचनाएँ करता गया । ध्मानुज श्रीमती लीलावती नामयण में कतिपय रचनाएँ देखी

तो यह प्रस्ताव किया कि इन रचनाओं का प्रयाशन हो क्योंकि नारी-जीवन के सन्दर्भ में बहुआयामी रचनाओं का अभाव है । यो उन्ह इन रचनाजों का स्तर भी पसन्द आया।

मुझ कोई निर्वाह भत्ता हो मिलता नहीं और मैने स्वतन्त्रता सयाम में अपने योगदान के लिए भी निर्वाहभत्ता नहीं लिया, क्योंकि मरी आत्मा इसका मूल्य लेने के लिए प्रस्तुत नहीं हुई ।

बस्ततः मातृभक्ति का मूल्य लेना तो पूर्व का करतब्य नहीं ही होना चाहिए मैंने भारत माता को भी माता मानकर ही ऐसा निर्णय लिया । मेने सीमित संस्या में ही इस संकलन के लिए रचनाओं का चयन किया।

इसके पश्चात् अपनी अन्य रचनाओं के भी वर्गीकृत सकलन प्रकाशित करने का प्रयास में करूंगा और इस उद्देश्य से ही पाण्डेय रचनावली- प्रकाशन संस्थापित किया गया है

लेखक रामदयाल पांडे-Ramdayal Pandey
भाषा हिन्दी
कुल पृष्ठ 54
Pdf साइज़3.3 MB
Categoryसाहित्य(Literature)

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