स्वप्न द्रष्टा | Swapn Drashta

स्वप्न द्रष्टा | Swapn Drashta Book/Pustak Pdf Free Download

पुस्तक का एक मशीनी अंश

उसकी मुलाकत चन्द्रगुप्त के मंत्री के साथ तुरन्त हो यई । योड़ी सो पसरी पुस्तकों में भी बह परिचय बोर गाड़ा हो जाय ऐसे सुया भी थे। परिचय बढ़ते ही बह प्रिय लगने लगा। बस तक्षशिला के ब्राह्मण में भीष्म की दृढ़ता का पोर मौर्य का सा यावेया था ।

उसका तेज देवी भगवान कौशिक जैसा नहीं था, पर ऐसा था कि एक बार खिा में बस जाय। वह नन्द का विनाश करने के लिए सदा ही उत्सुक दिखाई देता और अपनी प्रतिमा में बंधी अपने सिर की चोटी खुली रखता।

जल्दी ही वह स्वप्न मित्र हो गया और हमेशा स्वप्नों में इस नये मित्र पर उसका बढ़ता हुआ सद्भाव देवा कर उसके पुराने मित्रों को जलन होने सभी बी। पर एक व्यक्ति बहुत पीछे दोस्त हो और उसको पुराने मित्रों से छोटा गिना जाय यह उसकी न्यायवृत्ति को अच्छा नहीं लगा।

कुछ दिन बाद ही सुदर्शन अंग्रे जो स्कूल में दाखिल हुधा और अपनी होशियारी से और बाप की देखभाल से पोडे ही समय में बह आगे बढ़ने लगा । प्रमोदराय के मन में बेटे को कलेक्टर बनाने की इच्छा थी और अठारह

वर्ष की उम्र में बह बी० ए० पास करके इस उद्देश्य से छोटे-छोटे दजों से जल्दी- जल्दी पान करा देने की योजना उन्होंने बनाई थी चुपचाप पढ़ते हुए तथा पालकी में झूलते हुए सुदर्शन पंगे जी की पाँचवी कक्षा में पा गया।

शान्त और सीधे लड़के के जीवन में कुछ विशेष बदलाव नहीं हुआ।पाँचवी जमात में उसने औरंगजेब तक भारतवर्ष का इतिहास तथा एलिजाबेथ तक अंग्रेजी इतिहास पड़ा । दोनों विषयों में उसकी स्वप्नों की दुनिया बढ़ गई ।

लेखक कन्हैयालाल मुंशी-Kanaiyalal Munshi
भाषा हिन्दी
कुल पृष्ठ 334
Pdf साइज़14.1 MB
Categoryउपन्यास(Novel)

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