श्री तुकाराम चरित्र जीवनी और उपदेश | Sri Tukaram Charitra Jeevani Aur Upadesh

श्री तुकाराम चरित्र जीवनी और उपदेश | Sri Tukaram Charitra Jeevani Aur Upadesh Book/Pustak Pdf Free Download

पुस्तक का एक मशीनी अंश

अवतकके प्रथन्नोका निरीक्षण-ये तीन आधार बताये; अब इस प्रन्थका स्वरूप संक्षेपमे निवेदन करता हूँ। मधनावरणके पकथचात् पहिले कालनिर्णयका प्रश्न हल किया है ।

इसके बाद दो अष्यायोगे तुकारामका पूर्वचरित्र है और फिर समग्र मध्पवण उपालनाप्रभान है। यह उपासनाखत भीतुकाराम महाराजके वचनोंके ही आधारपर विलार- पूर्वक लिखा है

जिसमें ऐसा प्रयत्न किया गया है कि महारात्ट्रीय मागवत- धर्मानुयायियों अर्थात् बारकरियोंको और सामान्यतः सबको दी इस भागवतसम्प्रदायका विश्वर मूलकमसे यमार्ष परिक्षान हो:

मौर यह मालूम हो कि तुकाराम किस साधनकमसोपानसे साक्षात्कारकी पैढीतक चह गये, उनके सामने सगुणोपासनाका खस्य खुल आाय उम्हें भीविडक- स्वरूपका बोध हो

उनके लिये परमार्थमार्गपर चलना सुगम हो, भकिमार्गको ये स्पष्ट देख ले । यही इस बिस्तारका मुख्य हेतु रहा है। भावुक भगवद्रोंको यह मध्यलम्ड बहुत प्रिय भौर बोघपरद होगा ।

खम्प्रदायकी सिद्धान्तपञ्चद्थी बतवा एकादशीतत, नाम- संकीर्तन, सत्संग और परोपकारका महत्व तथा तुकारामजीके पूर्वाभ्यास बच्चे अनेक प्रकारकी बोडियोंसे माताकों पुकारते है,

पर उन बोलियोंका यथातथ्य ज्ञान माताको ही होता है। ऐसे जो उपाधिरहित अन्तर्ज्ञानी है, तुका उनकी वन्दना करता है, बार-बार उनके चरणोंमे गिरता है।

सन्तोंने मर्मकी बात खोलकर हमें बता दी है-हाथमें झाँझ, मजीरा ले लो और नाचो । समाधिके सुखको भी इसपर न्योछावर कर दो । ऐसा ब्रह्मरस इस नाम-सङ्कीर्तनमें भरा हुआ है ।

भक्ति भाग्यका वल-भरोसा ऐसा है कि उससे इस ब्रह्मरससेवनका आनन्द दिन-दिन बढ़ता ही जाता है। चित्तमें अवश्य ही कोई सन्देहान्दोलन न हो । यह समझ लो कि चारों मुक्तियाँ हरिदासों की दासियाँ हैं ।

इसीसे, तुका कहता है, मनको शान्ति मिलती है और त्रिविध ताप एक क्षण में नष्ट हो जाते है। सदा-सर्वदा नाम-संकीर्तन और हरि-कथा गान होनेसे चित्तमें अखण्ड आनन्द बना रहता है ।

लेखक लक्ष्मण रामचंद्र-Laxman Ramchandra
भाषा हिन्दी
कुल पृष्ठ 676
Pdf साइज़55.6 MB
Categoryआत्मकथा(Biography)

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