श्री चैतन्य देव | Sri Chaitanya Dev

श्री चैतन्य देव | Shree Chaitanya Dev Book/Pustak Pdf Free Download

पुस्तक का एक मशीनी अंश

महमूदशाहके नामसे विख्यात हुमा । तब राज्यके उमरावोने यदुके पुत्र अहमदशाहकी हत्या करके इतियस चाहिए एक बशघरको बगके राजसिहासनपर बैठाया। इसके पश्चात् अर्थात् ईसाकी १५वीं राताम्दीके अन्तिम दिनो बगदेशमें हब्सी क्रीतदासोका बोलबाला रहा।

सुलतान रुकनुद्दीन बर्बकशाह अकिकासे हव्यी खोजा लोगोको लाये । श्री- चैतन्यके पाविर्भावके पूर्व पर्यन्त अर्थात् १४८६ ई० पर्यन्त इलियसशाहके वशधर नानाप्रकारके विद्रोह और नरहत्याके ताण्डव-नृत्यके बीच पुन बगदेशमें राज्य करते रहे ।

मुसलमान शासनकर्ताधीने अवरोध-रक्षाके लिए हब्शी नपुसक क्रीतदासोको नियुक्त किया था । ये क्रीतवास लोग समय-समयपर तो राजाके अत्यन्त विश्वासपात्र बन जाते और फिर विश्वासघाती और स्वामी-हन्ता होते।

उस समय बगदेश में कपट, पड- यत्र, व्यभिचार, नरहत्या, राजहत्या, धर्मविद्वेष और अराजकताने जो भीषण रौद्ररूप धारण किया था, उसका वर्णन नहीं किया जा सकता।

अराजकतासे विचलित होकर बगदेशकी हिन्दू-जनता और मुसलमान अमीरोने परन्तमें अलाउद्दीन हुसेनशाहको बादशाह निर्वाचित किया। श्रीचैतन्यदेवके साथ उपत हसन शाह का साक्षात्कार हुआ था ।

बादशाह हुसेनशाहने तत्कालीन यशोहर (Jessore ) के अन्तर्गत फतेहाबादके निवासी भरद्वाजगोत्रीय श्राह्मणके कुलमें धाविभूत श्रीसना- तनको अपने प्रधानमत्रीका पद देकर उनको ‘साकरमल्लिक’

(साकर- गभीरार्यं बाक्यके रचयिता , मल्लिक-नवानवुद्ध पथया कूटनैतिक- श्रेष्ठ, चतुरशिरोमणि) तथा उनके छोटे भाई थीरूपको दबीरलास (दबीर-मुशी, Secretary. , सास-निजस्व, प्रचान, विशिष्ट, अथवा कबीर- लेखक, सास की उपाधि से विभूषित किया।

सोनपुरके हरिहरक्षेत्रके मेलेमें बादशाहके लिये घोडा खरीदनेके कार्यमे नियुक्त थे। श्रीसनातन और श्रीरूपके छोटे भाई श्रीवल्लभ (बीचैतन्यदेवका प्रदत्त नाम श्रीमनुषम-श्रीजीवगोस्वामिपादके पितृदेव) गौडकी टकसालके अध्यक्ष थे।

बादशाह हुसेनशाहकी उडीसा और कामरूपकी चढाईमें किये गये अमानुषिक अत्याचारोको देखकर दबीरखास और साकरमल्लिकको विशेष मनोव्यथा हुई। हुसेनशाहने उडीसापर आक्रमण करके वहाँके देवमन्दिरोको नष्ट कर दिया था ।

कहा जाता है कि इस हुसेनशाहके शिक्षक (?) मौलाना सिराजद्दीन या चाँदकाजी उस समय नवद्वीपके शासनकर्ता नियुक्त हुए थे।

उन्होने पहले श्रीनिमाइके द्वारा प्रवर्तित सकीर्तनके विरुद्ध प्राचरण किया और श्रीश्रीवास पडितके घरके समीपवर्ती एक नागरिकके कीर्तनके खोल (मुदग) को फोड दिया।

लेखक सुंदरानंद विद्याविनोद-Sundaranand Vidyavinod
भाषा हिन्दी
कुल पृष्ठ 500
Pdf साइज़49 MB
Categoryसाहित्य(Literature)

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