सर फ़िरोज़शाह मेहता | Sir Phirozshah Mehta

सर फ़िरोज़शाह मेहता | Sir Phirozshah Mehta Book/Pustak Pdf Free Download

पुस्तक का एक मशीनी अंश

एक मध्यम मेखी के ममुच्य थे। जिस समय सर फ्रीवेजवाद मेहता का जन्म हुआ, उसके पहले ही मिस्टर दीनशा खुसबी बाचा का जन्म होगया था । वास्तव में मिस्टर दीनशा ुलबी बाचा इनसे पक बर्ष मेटे थे । दीनाथाचा] की पारती थे। वे भी प्रसिद्ध देशभक्त थे।

इन दोनों पारखी सज्जनों में बड़ी धनिट मित्रता घो। इन दोनों महापुरुषों ने অपने पृथला से भारत का बड़ा उपकार किया। इसमें सन्येह नहीं कि इस समय देश के काम में बहुत लोग लगे हुए है। परन्तु उक्त पारसी सज्जनों ने उस समय देश के काम में अपना जीवन बिताया, जबकि और लोगों का ध्यान इस ओर आकर्षित भी नहीं हुआ था।

सर फीरोज़शाह मेहता का नाम भी उन्हीं मनुष्यों में लिया जगणकता है, जिन्होंने देश के हित के लिए अपना जीवन बिता दिया।पारसी लोग प्रायः व्यापारी हुआ करते हैं । सर फीरोज़शाह मेहता के पिता भी व्यापारी थे। वे केवल भारत में ही व्यापार नहीं करते थे, किन्तु विदेश में भी।

पहले तो वे चीन में ही अधिक व्यापार करते थे, परन्तु धीरे धीरे वे लन्दन में भी व्यापार करने लगे और इसमें अच्छी उन्नति की । उन्होंने अंगरेजी का. अच्छा अभ्ययन किया था और व्यापारियों में वे अपनी विद्या-कुशलता के लिए बहुत प्रसिद्ध थे।

व्यापारी लोग उन्हें साहित्यिक स्यारपारी कहा करते थे । जिस दिन सर फीरोजशाह मेहता का जन्म हुआ, उसी दिन पिता ने उन अच्छी तरह से पढ़ाने का संकल्प किया था और उनकी प्रशंसा में यह बात कही जा सकती है कि उन्होंने अपने इस संकल्प को कार्य

रूप में परिणत करके ही छोड़ा। उनके पिता व्यापारी थे, परन्तु वे शिक्षा के लाभों से भलो भाँति परिचित थे । इसीलिए उन्होंने अपने पुत्र सर फीरोज़शाह मेहता के पढ़ाने में खूब धन खर्च किया।

लेखक अवध उपाध्याय-Avadh Upadhyay
भाषा हिन्दी
कुल पृष्ठ 69
Pdf साइज़4.9 MB
Categoryआत्मकथा(Biography)

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