श्री आई माताजी का इतिहास | Shri Aai Mataji Ka Itihas

श्री आई माताजी का इतिहास | Shri Aai Mataji Ka Itihas Book/Pustak PDF Free Download

पुस्तक का एक मशीनी अंश

संक्षिप्त इतिहास

संवत् 1250 के भास-पास ब्रह्मा की लेड नामक राज्य पर गोहिलों का शासन था । गोहिल राजा का मंत्री डाबी जाति का सांवतसिंह था। किसी कारण राजा से अनबन हो जाने से मंत्री सांवतसिंह प्रसथानजी से मिलकर खेड़ पर हमला करा दिया।

गोहिलों की हार हुई व राव आसथानजी का शासन हो गया । तब डाबी सांवतसिंह खेड़ छोड मांडू (मांडवगढ) से 20 मील दूर अम्बापुर नामक गांव में श्राकर बस गया ।

उसी डाबी जाति के सांवतसिंह वंश में अनुमानतः संवत् 1440 के आस-पास बीका का जन्म हुआ । बीका डाबी बचपन से ही अम्बा माता का भक्त था । अम्बापुर में मां अम्बा का मंदिर था।

उसी मंदिर में जाकर बीका हमेशा अम्बा माता की भक्ति किया करता था। बीकाजी के ब्याह के कई वर्ष बीतने के बाद भी उनके कोई सन्तान नहीं हुई तो वे हमेशा मां अम्बा से सन्तान प्राप्ति की आराधना किया करता था।

बीकाजी की अटूट आस्ता व भक्ति देख, एक रात मां अम्बा ने स्वपन में दर्शन देकर बीका को वरदान दिया कि “मैं तेरी भक्ति से बहुत प्रसन्न हूँ। तेरी मनोकामना पूर्ण होगी, मैं तेरे घर कन्या रूप में आऊंगी।”

यह वरदान दे मां अम्बा अलोप हुई। सुबह उठ कर बीकाजी ने अपनी पत्नी को स्वपन की बात बताई। मां अम्बा की कृपा देख दोनों पति पत्नि बहुत खुश हुवे |

संवत् 1472 के श्रास पास माँ अम्बा के दिये वरदान से बीका के घर एक कन्या का जन्म हुआ । कन्या के जन्म से बीकोजी प्रति प्रसन्न हुवे । कन्या का नाम जोजी रखा । जोजो तो माँ अम्बा का ही रूप थी। श्रतः बाल्य काल से ही भक्ति में लीन रहतो

लेखक नारायणराम लेरचा-Narayanram Lercha
भाषा हिन्दी
कुल पृष्ठ 88
Pdf साइज़14.3 MB
Categoryइतिहास(History)

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