शिशु का अधिकार (जच्चा बच्चा) | Shishu Ka Adhikar

शिशु का अधिकार (जच्चा बच्चा) | Shishu Ka Adhikar Book/Pustak Pdf Free Download

पुस्तक का एक मशीनी अंश

ब-मानसिक शांतिधाराम-पायम का विचारी से बहुत ही नजदीकी संबंध है यदि प्यावमी निठला बैठा रहता है तो उसके विचारों में खलबली पैदा होना, इधर उधर के मनहूस विचार आना कोई आश्चर्य की बात नहीं है।

ये उसकी आवतों को विगाइ उसका शारीरिक स्वास्थ्य भी बिगाड़ देते हैं। चिन्ता तो किसी भी दशा में अच्छी नहीं है फिर ऐसी हालत में उसे कौन चाहेगा ? काम करना खराब नहीं है, काम में विधे रहना बिलकुल उचित है, हाथ पर हाथ रख निठल्ले बैठे रहना अनुचित ही नहीं, मूर्खता है।

हां इतना ध्यान रखना चाहिये कि थकावट नहीं आना चाहिये, थकावट आते ही आराम कर लेना चाहिये। दोपहर को घंटे आध घंटे पैरों को कुछ ऊपर उठाकर आराम करने की आदत डालना खराब नहीं है। यदि रात्रि में जल्दी आराम न मिल सके तो शाम को गई पर ही घंटे

आप घंटे लेटकर हाथ पैर बिलकुल दीले छोड़ देना चाहिये। रात्रि में भी ८ घन्टे के बदले ६-१० घन्टे आराम करना चाहिये ।अक्सर पहिली जचकी के समय उसे यह कहा जाता है कि-‘देखना तू अभी बची है, जचकी कोई गुड़ियों का खेल नहीं है, लोहे के चने चबाना है। भत्ता, जरा संभल कर रहना ।

पर सच तो यह है कि चालीस साल की आयु में होने वाली पहिली जचकी बीस साल की (बची!) आयु होने वाली पहिली जचकी से अधिक कष्ट प्रद होती है। इसलिये नवेली बहू को पास पड़ोस की उल जलूल बातों में न आना चाहिये।

किसी किस्म का शक होने पर उसे अपने हितचिन्तक व चिकित्सक से पूछताछ करने में तनिक सी भी हिचकिचाहट नहीं करनी चाहिये।हां इतना ध्यान रखना चाहिये कि थकावट नहीं आना चाहिये, थकावट आते ही आराम कर लेना चाहिये। दोपहर को घंटे आध घंटे पैरों को कुछ ऊपर उठाकर आराम करने की आदत डालना खराब नहीं है।

लेखक पी॰ एल॰ चोपरा-P. L. Chopara
भाषा हिन्दी
कुल पृष्ठ 153
Pdf साइज़6.4 MB
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