शक्तिमयी | Shaktimayi

शक्तिमयी | Shaktimayi Book/Pustak Pdf Free Download

पुस्तक का एक मशीनी अंश

यह कोई भूमिका नहीं है। सामान्य आत्मनिवेदन ही है यह मेरी धर्मपत्नी स्व. श्रीमती चन्द्रावती पाण्य आदी धर्मपत्नी एवं नारी थी। बेन जाने कितने पुरुषों और कितनी महिलाओं को धर्ममाता थी ।

६ मा्. १९६८ को ही व दिवागता हा गई। उनके अद्धालुओं ने उनकी पुण्यस्मृति में चन्द्रावती पाण्डेय गोष्ठी सस्थापित की और उसके लिए स्थायी निधि जमा कर दी ।

इस गोष्ठी का संचालन बिहार-महिला हिन्दी-साहित्य-संगम के तत्वावधान में संगम की विदुषी एवं प्रतिभा- शालिनी महासचिव प्रो० डॉ० श्रीमती उषा रानी सिह करती है और उक्त निधि की भी संचालिका के ही है।

स्व० श्रीमती चन्द्रावती पाण्डेय की प्रबल आकाक्षा पी कि में सरकार के समक्ष मुझ नहीं बीर भारतीय गारी समाज के सम्बन्ध में भी कविवाएं लि। उनके जीवनकाल में तो यह लेखन सम्भव न हो गका,

परसु इधर में स्वयं को सरकारी पद से इस्चम मुक्त कराकर फरमशঃ एस रचनाएँ करता गया । ध्मानुज श्रीमती लीलावती नामयण में कतिपय रचनाएँ देखी

तो यह प्रस्ताव किया कि इन रचनाओं का प्रयाशन हो क्योंकि नारी-जीवन के सन्दर्भ में बहुआयामी रचनाओं का अभाव है । यो उन्ह इन रचनाजों का स्तर भी पसन्द आया।

मुझ कोई निर्वाह भत्ता हो मिलता नहीं और मैने स्वतन्त्रता सयाम में अपने योगदान के लिए भी निर्वाहभत्ता नहीं लिया, क्योंकि मरी आत्मा इसका मूल्य लेने के लिए प्रस्तुत नहीं हुई ।

बस्ततः मातृभक्ति का मूल्य लेना तो पूर्व का करतब्य नहीं ही होना चाहिए मैंने भारत माता को भी माता मानकर ही ऐसा निर्णय लिया । मेने सीमित संस्या में ही

इस संकलन के लिए रचनाओं का चयन किया। इसके पश्चात् अपनी अन्य रचनाओं के भी वर्गीकृत सकलन प्रकाशित करने का प्रयास में करूंगा इस उद्देश्य से ही पाण्डेय रचनावली- प्रकाशन संस्थापित किया गया है

लेखक रामदयाल पांडे-Ramdayal Pandey
भाषा हिन्दी
कुल पृष्ठ 74
Pdf साइज़4.1 MB
Categoryधार्मिक(Religious)

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