संत कबीर | Sant kabir

संत कबीर | Sant kabir Book/Pustak Pdf Free Download

पुस्तक का एक मशीनी अंश

नीर’ सियते समग नाना नाना की मन प्रकण-नमार जा गई है।उमके उसी पहलका परिचय विपोष रूपसे कराया गया है जिसे कमी वासमे थपिक ने किया या। पाठक धुरत कमे बयारवान

प्वगे कि कमीरवास बहुत-फुळको भस्वीार करनेका अपार साहस केर अवतीर्ण हुए थे । उन्होंने तत्काल प्रचलित भाना साबन मा्गोपर उप्र भाक्रमण किया है।

कबीरदासके इस विशेष रविकोणको स्पष्ट रूपसे हृदयगम करानेके लिए मैंने उसकी ओोर पाठक की सहानुभूति पैदा करने की चेष्टा की है। इसी लिए कहीं कहीं पुस्तक में ऐसा सम सकता है

रेखक भी व्यक्तिगत भावसे किसी साधन मार्गका विरोधी है। परन्तु बात ऐसी नहीं है । जहाँ कही भी अवसर मिला है बहीं ठेख रने इस भ्रमको दूर करने का प्रयास किया है,

पर फिर भी यदि कह्ी श्रमका अवकाश रह गया हो तो बह इम वक्तव्यसे दूर हो जाना चाहिए । कबीर वासने तत्कालीन नाम पन्थी योगियों की साधना क्रिया पर भी आक्षेप किया है,

यबारथान उसकी चर्चा की गई है। पुस्तकके अधिकांश स्थलोम योगी’ शब्दसे इन्ही नाथपन्यी योगियोंसे तात्पर्य है। समाधिके विरुद्ध जहाँ कहीं कबीरदास ने कहा है वह ‘अव-मामाधि’ अर्थ समझना चाहिए।

यथाप्रसंग पुस्तकमे इसकी चर्चा आ गई है वैसे, कबीरदास जिस सहज-समाधिकी बात कहते है यह योगमार्गसे असम्मत नहीं है । याँ यह भी कह रखना जरूरी है

पुस्तको भिन्न भिन साधन-मार्गाक ऐतिहासिक विकासकी ओर ही अधिक ध्यान दिया गया है।पुस्तकके अन्तमें उपयोगी समक्ष कर ‘कबीर-बाणी नामसे कुछ चुने हुए पद्य संग्रह किये गये हैं।

उनके शुरू के सौ पद श्री आचार्य क्षिति मोहन सेनके सग्रहके हैं। इन्हीको कविवर रवीन्द्रनाथ ठाकुरने अंग्रेजीमें अनूदित किया था आचार्य सेनने इन पद्धोको लेनेकी अनुमति देक नाधूरामी प्रेमीने अपने स्वाभाविक प्रेम और उत्साह के साथ पुस्तकको प्रकाशित किया है,

लेखक हजारीप्रसाद द्विवेदी-Hajariprasd Dwivedi
भाषा हिन्दी
कुल पृष्ठ 385
Pdf साइज़9 MB
Categoryआत्मकथा(Biography)

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