संध्या मंत्रो के विभिन्न पाठ | Sandhya Mantro Ke Vibhinn Path

संध्या मंत्रो के विभिन्न पाठ | Sandhya Mantro Ke Vibhinn Path Book/Pustak Pdf Free Download

पुस्तक का एक मशीनी अंश

एक बस है और उसमें बड़े ही दोष हैं परन्तु जब वह जल के समीप जाता है तो जल उसे निर्मल और स्वच्छ बना देता है । इसी प्रकार हमें भी अपनी आत्मा के द्वारा जो मल विचेप आवरण हैं

उनके शान्त करने के लिए हमें सबसे पूर्व माता सन्ध्या का पूजन करना है। उसके पाठ को करना है। जिससे हमारा वास्तविक कल्याण हो जाएगा।प्राज सुन्दर समय में परमपिता

परमात्मा ने हमें इन वेद मत्रों के उच्चारण करने का सुअवसर दिया आज इस अमृतबेला में उस गान को गाएं, जिससे हम देवता बन जाएं देवता जन प्रातःकाल में कैसे अमृत को पान किया करते हैं

हे प्रातःकाल की अग्नि! तू हवि है । तू हव्य पदार्थों को उत्पत्र करने वाली है । तू हमें हव्य पदार्थों को पान करा, जिससे हम देवता बन जाएं और देवता-गों के समाज में विराजमान होकर देव वाणियों को विचारें,

जिससे हमारी विचारधाराएं हर स्थान में देववृत्ति ही बनी रहे। आज इस प्रातःकाल में प्रभु का गुणगान गाएं है परमात्मन्! तू कल्याण करने वाला है। तुने हमारे कल्याण के लिए नाना सामग्री उत्पन्न की है।

हे प्रभु! हम आपसे कल्याण चाहते हैं। इस संसार को नियम से बनाने वाले, हे इन्द्र! हमारे जीवन को भी नियमित बना । जब हमारा जीवन नियमित होगा, तो हम सब कुछ कार्य कर सकेंगे ।

आपने प्रातःकाल में सूर्य को उत्पन्न किया है, इसी प्रकार हे देव! हम उस महान ज्योति को चाहते हैं जिससे हमारा आत्मिक कल्याण हो यह महान ज्योति हमारी सन्ध्या की व्याहतियां है

जब सन्ध्या की व्याहृतियों को जाना जाता है तो वह सन्ध्या वास्तव में हमारा कल्याण करा देती है । जब देवता सन्ध्या के द्वार पर जाते हैं तो सन्ध्या पुकार कर कहती है कि हे देवताओं!

लेखक
भाषा हिन्दी
कुल पृष्ठ 29
Pdf साइज़1 MB
Categoryधार्मिक(Religious)

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