सामाजिक विघटन तथा सुधार | Samajik Vightan tatha sudhar

सामाजिक विघटन तथा सुधार | Samajik Vightan tatha sudhar Book/Pustak Pdf Free Download

पुस्तक का एक मशीनी अंश

उन अपराधियों के शरीर के विभिन्न अंगों में अनेक विलक्षणतायें पायीं-जैसे अनेक खोपड़ियों में दाँत, खोपड़ी के घनत्व (Capacity) मार्च की बनावट आदि में कुछ न कुछ पनोखापन उन्हें मिला । ये विलक्षणतायें

ग्राम लोगों की विशेषतामों से बहुत कुछ समान थीं और इसी कारण श्री मोम्बोसो को यह विश्वास हो गया कि अपराधियों में वंशानु संक्रमण के द्वारा उनके आदि-पुरस्कों में पाये जाने वाले जंगलीपन या पशुता का पुनराविर्भाव होता है,

प्रादि-पूर्वजों का जंगलीपन या पशुता जब बंशानुसंक्रमण की प्रक्रिया के द्वारा किसी व्यक्ति में आ जाते हैं तो वह व्यक्ति भी अपराधी व्यवहार करने लगता है। श्री लम्बिोसो के स्वयं के ही शब्दों में, “प्रपराधियों में इन पाश्चर्य जनक

अनियमितताओं (Strange anomalies) को देखकर एक प्रज्वलित क्षितिज (Infiamed horsion) के नीचे एक विशाल भूमि दिखाई देने की भॉति, अपराधी की प्रकृति तथा उनकी उत्पत्ति की समस्या सुलझ सी गयी ।

प्रादिम मानव तथा निम्न कोटि के पशुओं की विशेषताओं या प्रकृति का हम लोगों के समय में भी अवश्य ही पुनराविर्भाव या पुनर्जन्म होता है ।” दूसरे शब्दों में, जब किसी व्यक्ति में वंशानुसंक्रमण की प्रक्रिया के द्वारा प्रादिम मानव व निम्न

कोटि के पदाओं की विशेषतायें मा जाती हैं तो उस व्यक्ति की प्रकृति भी उसी आदिम मानव और पशु जैसी होती है और उसी जन्मजात प्रकृति के कारण वह व्यक्ति अपराध करने को बाध्य होता है। इसी भांति अपराधी का जन्म होता है।

इस प्रकार प्रपराधो अन्य साधारण व्यक्तियों (जिनमें आदिम मानव व पशुओं की विलक्षणतायें नही मिलती है) से अलग एक वर्ग या टाइप होता है जिसके अनुसार अपराधी शारीरिक तथा मानसिक अनियमित तानों का एक घनीभूत रूप ।

लेखक सरला दुबे-Sarla Dubey
भाषा हिन्दी
कुल पृष्ठ 745
Pdf साइज़105.5 MB
Categoryविषय(Subject)

सामाजिक विघटन तथा सुधार | Samajik Vightan tatha sudhar Book/Pustak Pdf Free Download

Leave a Comment

Your email address will not be published.