रोशनाई बनाने की पुस्तक | Roshanai Banane Ki Pustak

रोशनाई बनाने की पुस्तक | Roshanai Banane Ki Pustak Book/Pustak Pdf Free Download

पुस्तक का एक मशीनी अंश

डिधि डिवि वा बाजे और दूसरे फलों में एक दूसरी खटाई मौजूद है जो व्यानिन की तरह लोहे के भस्म के साथ रंगदार चीज़ बनाती है। आम की गुठली में भी यह मौजूद है। फल या गुठली को लेकर पानी के साथ उबालते हैं और फिर ठण्डा करते हैं।

रस में से भूरे लेखा माय रंग के ज़रें तह पर बैठ जाते हैं। इनको अलग कर हड्डी के कोयले में से छानते हैं और इससे रंग अलग हो जाता है। पर ग्या लिक ऍसिद्ध के बनाने का अच्छा कायदा यह है कि माजूफल के रस को हवा में गरम करने से कुछ देर बाद ग्यालिक पॅसिड बन जाती है।

चमड़ा कमाने में यह किसी काम की 1. नहीं, इसलिए वह छाल जो चमड़ा साफ करने के काम में भाई हो उसके रस से स्याही बना सकते हैं।मासूखी मोरचा जो खास देखने में होता है उमें ऑफिडजन] ज्यादा होता है १६८ तोले सोहा, १४ तोले Oxygen दोनों किसिम के भस्म टॅनिन या व्याख्या पॅसिड के साथ रंगदार रोशनाई बनाते हैं,

पर रंग में भेद होता है।यह भस्म टॅनिन के साथ अलग अलग रंग की स्याही बनाते हैं, पर यह सब खटाई सुखी न होने से कुछ गदसी होती।पीछे चल कर उन चीजों का दाल दंगे और दाम का कुछ अन्दाज़ा लगायँगे जो रोशनाई बनाने के काम में आती है।

पुरानी स्याही बनाने की तरकीबपहिले माजूफल की बुकनी बनाते हैं फिर उसको एक काठ के बरतन में रख कर आधा पानी उस पर छोड़ते हैं।दुसरे बरतन में कसौस और गोद को अलग २ गलाते हैं। इन दोनों को मिलाने से काली स्याही बन जाती है । और एकदम काम में जा सकती है। पर दो महीनों में काला र आता है।

लेखक लक्ष्मी चंद-Laxmi Chand
भाषा हिन्दी
कुल पृष्ठ 59
Pdf साइज़4.8 MB
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