रविंद्र टागोर वचनामृत | Ravindra Tagore Vachnamrit

रविंद्र टागोर वचनामृत | Ravindra Tagore Vachnamrit Book/Pustak Pdf Free Download

पुस्तक का एक मशीनी अंश

मनुष्य को कठिनाई में पड़ने पर अपना सब कुछ प्रभु को सांप देना चाहिए कि है मुरारे तुम्हारी माया तुम्हारे हवाले और निश्चित होकर सो जाएं।• मैंने सदैव अपने आस-पास के वातावरण से परम शांति पाई है।

यह शांति मुझे परमेश्वर की शांति प्रतीत होती है। जय आप शांत, आंखें मूंदकर बैठ जाते हैं तो परमात्मा तुम्हारे अस्तित्व से तुम्हारा परिचय करा देते है।• हम मनुष्य क्यों हैं? और क्या हमारे कर्तव्य हैं,

इस पर मैंने बहुत मनन किया लेकिन एक बात शायद किसी ने न सोची हो कि यह सब किसकी कृपा है। जिसने इस पर मनन किया है वही मनुष्य है।• सभी के लिए हमारे मन में करुणा और दया होनी चाहिए।

इस तरह हम अपना जीवन धन्य बनाते हैं।• जब मृत्यु शाश्वत सत्य है तो मनुष्य हाय-तौबा क्यों मचाता है। शायद अपनी कीर्ति को अक्षय रखने के लिए। लेकिन जीवन के लिए संघर्ष करना ही पड़ता है,

इसलिए जीवन में जितनी पवित्रता होगी, उसका फल भी उतना ही स्थायी होगा, ऐसा मेरा निजी विचार है। बड़ी-बड़ी योजनाओं की अपेक्षा छोटी-छोटी योजनाओं पर काम किया जाए तो ज्यादा लाभ अर्जित किया जा सकता है।

शायद इसीलिए मैं कविताएं लिखता हूं, बड़े-बड़े ग्रंथ नहीं।• मेरा अपना विचार है कि प्रत्येक रचनाकार अपनी रचना में जीवन के अनुभूत सत्य ही उजागर करता है. इसलिए प्रत्येक रचनाकार की कृति को बड़ी रुचि से पढना चाहिए।

गुलामी दो तरह की होती है। एक तो बाहरी और दूसरी भीतरी। बाहरी गुलामी से छुटकारा पाना संभव है, लेकिन भीतरी गुलामी से छुटकारा पाना संभव नहीं।क्या केवल आदमी का बाह्य रूप ही सब कुछ होता है।

लेखक रवींद्रनाथ टागोर-Ravindranath Tagor
भाषा हिन्दी
कुल पृष्ठ 20
Pdf साइज़1 MB
Categoryसाहित्य(Literature)

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