राष्ट्रीय सन्देश | Rashtriya Sandesh

राष्ट्रीय सन्देश | Rashtriya Sandesh Book/Pustak Pdf Free Download

पुस्तक का एक मशीनी अंश

जब प्रेम का डंका बजा दिया, मन मोहन वंशी वाले ने । मृतकों में जीवन जगा दिया, मनमोहन बंशी वाले ने ॥ टे० ॥ आज्ञान अन्धेरी काली थी, मुश्किल होना रखवाली थी। सोते से हमको जगा दिया, मनमोहन बन्शो वाले ने ।। १ ॥

गोता उत्तम पुस्तक रच कर, भर दिया प्रेम मोहक मंतर । अजुन को निर्भय बना दिया, मनमोहन बंशी बाले ने ॥ २ ॥ दुःशासन शकुनी दुयोधन, करना चाहें दौपदी नगन । बस बसन उसो दम बढ़ा दिया, मनमोहन वंशी वाले ने ॥ ३ ॥

पल्टने* खड़ी थीं लड़ने को, कट कट कर रण में अड़ने को । तब गुल विजय का बजा दिया, मन मोहन बंशी वाले ने ॥५॥ दुर्योधन महारथी मारे, खुटे खुं के बारे । अर्जुन का झारडा खड़ा किया, मनमोहन बंशी वाले ने ॥ ४ ॥

अब गौवें दुःख से चिल्लातीः सुन कर दुःख से फटती छाती। है यदा यदा संकेत किये, मन मोहन बंशी वाले ने ॥ ६ ॥ गोपाल कृष्ण फिर आयेंगे, बधिकों से गाय बचायेगे। जो सतरह फंस विध्वंस किया, मनमोहन वनसी वाले ने ॥ ८ ॥

दादरा सैरमाला जरा सोते हुये को जगादो हरे। जरासोते। बहुत तो हन बने और फिरेली दर बदर ॥ ऐक्य कर दुर बुरी फुट वसाई घर घर ॥ आत्म अभीमान भरे योग्य बने वे अवतो। देश कल्यान कर गाना करें कह हरहर ।। गिरे भावों को उचे बनादो हर॥

जरासोते० ॥ और तो देस सभी मौज उड़ाते भारी। प्राप्त अधीकार कीये गर्व दिखाते भारी॥कन्तु है जीन्द अ्रमीतक अयोग्पति आ्मतो । उसे अघीकार दिये पूर्ण न जाते भारी। स्वत्य पाने की शिक्षा सीखादो हरे। जरासोते० झीड़कीयां खुब सही हां हजुर कह कह कर कुप मनहूक वने अन्ध कुप में रह कर ॥

लेखक लोकमान्य तिलक-Lokmanya Tilak
भाषा हिन्दी
कुल पृष्ठ 24
Pdf साइज़1 MB
Categoryप्रेरक(Inspirational)

राष्ट्रीय सन्देश | Rashtriya Sandesh Book/Pustak Pdf Free Download

Leave a Comment

Your email address will not be published.