राष्ट्र भारती | Rashtra Bharti

राष्ट्र भारती | Rashtra Bharti Book/Pustak Pdf Free Download

पुस्तक का एक मशीनी अंश

विधर देखो पर पाय दी क्त देव पड़े हैं। ! इसी पूरा-पूरा पालन करना इय होगों का पर्य है इसी से सखोगों के चरित्र की शोभा बहती। कह रा र निर्भर है, और वह स्वार देय है जिसे सामने पर हमलोग प्रेम सय से सफे ह ।

इस कार लोगों के मन में एक देवी सहिजो शुज सभी को पुरे- कामो के करने से रोकती है और अछे कमों की ओर इगारी पति को शुकाती है यद पहुचा देखा गया है कि जय ईमनुष्य बयोदा काम करता है, तब बिना किसी केप हो खता और और अपने मन में दुगी होता है।

ऐसा पहुचा देखा जाता है कि या ध्यो कोई खड़लिसी मिठाई से जुराकर खा लेता है तब ह नन में उरा करता है औीर पेसे पार ही पीता है कि मैने ऐसा काम क्यों किया, मुझे अपनी साना से कट कर खाना या ।

इसी प्रकार का एक पूरा स्था, जो कभी कुछ चुराकर नदी खाना, स्पा सा रहता है और उसके मन में कभी विसी प्रधार ा इर भर पंहताा मही होता। इसका स्था कारण यदी कि हम लोगों का पर्याय कि हम कभी चोरी न करें। परन्तु जब पोरी पैठते तेप हमारी आत्मा इसमें कोसने लगती है।

इसलिए हमारा यह धर्मसिंहमारी पारमा हमें जो के से अनुसार हम करें। विश्वास रखो कि जब तुम्नाग पन किसी काम करने से हिचकिचार और बागे, तब भी तुम उस परम को न हो। मुम्हें अपना धर्म-पान करने में बहदुचा रुप्ट छठाना पड़ेगा, पर इससे नुय साहस न बोलो ।

क्या हुआ जो तुम्हारे पड़ोसी ठग-विद्या और असत्या पवा से धनाध्य हो गये और तुम कंगान ही रद गये, कया हुआ थो दूसरे होगों ने भूठी चांटुरी फे मौच- रिया पानी धीर तुम्हें कुछ नहीं मिला, और क्या हुआ जो दूसरे नीच

लेखक रामनाथ सुमन-Ramnath Suman
भाषा हिन्दी
कुल पृष्ठ 186
Pdf साइज़9 MB
Categoryसाहित्य(Literature)

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