रमजान करीम | Ramadan kareem

रमजान करीम | Ramadan kareem Book/Pustak PDF Free Download

पुस्तक का एक मशीनी अंश

रोज़ा

हदीस नं. 6) हज़रत अबू हुरैराह (रजीअल्लाहु अन्हु) से रिवायत हैं कि रसूलअल्लाहू (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमाया, अल्लाह तआला फरमाता हैं कि इब्ने आदम (औलादे आदम) का हर अमल उसके लिए हैं

सिवाह रोज़े के, क्योंकि रोज़ा मेरे लिए हैं और उसकी जज़ा मैं ही देता हूं । (रसूलअल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने आगे फरमाया) रोज़ा ढ़ाल हैं और जिस दिन तुम में से कोई रोज़े से हो

तो न फहश (बेहुदा और बेवजह की बातें करे और न झगड़े। अगर उसे कोई गाली दे या लड़े तो कह दे कि मैं रोज़े से हूं । क़सम हैं उस जात की जिसके कब्जे में मुहम्मद की जान हैं.

रोज़ादार के मुंह की बू अल्लाह तआला को मुश्क की खुश्व से ज्यादा प्यारी है। रोज़ादार के लिए दो खुशियां हैं जिनसे उसे फरहत (खुशी) होती हैं । इफ्तार करे तो खुश होता हैं और जब अपने रब से मिलेगा तो रोजे की वजह खुश होगा।

(सहीह बुखारी, जि. 2. स. 673. हदीस 1805) हदीस नं. 7) हज़रत महल बिन साद (रजीअल्लाहु अन्हु) मे रिवायत हैं कि रसूल अल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमाया,

जलत में एक दरवाजा है जिसको रय्यान कहा जाता हैं। क़यामत के दिन रोज़ादार उससे दाखिल होंगे और उनके सिवा उससे कोई दाखिल नहीं होगा। कहा जाएगा, रोज़ादार कहां हैं ?

हज़रत अब्दुल्लाह बिन उमर (रजीअल्लाहु अन्हु) बयान करते हैं कि रसूलअल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमाया, रोज़ा और कुरआन बन्दे के लिए कयामत के दिन सिफारिश करेंगे ।

रोजा कहेगा, ऐ मेरे रब मैंने इसे खाने और ख्वाहिशे नफ्स से रोका लिहाज़ा इसके लिए मेरी सिफारिश कबूल फरमा। और क़ुरआन कहेगा, ऐ मेरे रब मैंने इसे रात के वक़्त नीन्द से रोका

लिहाज़ा इसके लिए मेरी सिफारिश क़बूल कर । रसूलअल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमाया, दोनों की सिफारिश कबूल कर ली जाएगी।

लेखक इमरान शेख-Imran Shaikh
भाषा हिन्दी
कुल पृष्ठ 34
Pdf साइज़490.3 KB
Categoryधार्मिक(Religious)

रमजान करीम | Ramadan kareem Book/Pustak PDF Free Download

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *