नवछन्द | Nav chhanda

नवछन्द | Nav chhanda Book/Pustak Pdf Free Download

पुस्तक का एक मशीनी अंश

पानी काव्य यानी लेसन 2 बच बानी बड़ पानी अपेतन गय को नवीन तया पच को सजीव माना जाता है पच को सजीव मानने का कारण है गति ! गति सजीव होने का प्रमुख लक्षण है निर्जीव में गति नहीं होती ।

एक ही भाषा में व्यक्त एक ही भाव के गय तथा पद्य दो रूप हो सकते हैं और यह बात सभी जन भली प्रकार जानते है कि पत्र में व्यक्त भाव शीघ्र स्मरणीय, तीन प्रभावकारी तथा आनम्द दायक होता है। जिस प्रकार निर्जीव शरीर में प्राणों का प्रवेश होते ही बह गतिमान हो जाता है

उसी प्रकार किसी भी भाव में छन्द रूपी प्राणों का प्रवेश होते ही वह भाव गतिमान तथा आनन्ददायक हो जाता है। काव्य को चेतन तथा गद्य को अचेतन मानने का कारण भी यही है कि भाषा का गद्य रूप गतिशील तथा प्रभावकारी नहीं होता यह हृदय पर ऐसा असर नहीं करता जैसा कि पद्म रूप असर करता है ।

किसी भी बात को सङ्गीतबद्ध करके प्रस्तुत करना ही कविता करना है और भाषा को सङ्गीतबद्ध करने के लिए छन्दबद्ध किया जाता है यानी छन्दबता और सज्गीतबद्धता परस्पर पर्यायवाची हैं । बेद’ को काय कहने का कारण मात्र बेद का छम्दबद्ध होना है।

बेद ‘ अनुष्ट्रप” जाति के छन्दों में रचित है ये छन्द ‘बंदिक-छन्द’ कहताते हैं ।वास्तव में छन्द ही सम्पूर्ण सृष्टि का आधार है । हवा का चलना, नदी का बहना, दिन-रात. सूर्य-चन्द्र की गति, ब्रह्माण्ड, सब कुछ लय-बद है अगर कहीं भी ‘लय-भङ्ग’ हो जाए तो सर्वनाश हो जाए संसार एक लय में गतिशील है जब भी इस ‘लय’ में व्यवधान होता है

तभी प्रलय होती है नाश होता है। संसार का सबसे बड़ा अपराध, महापाप ‘लय-भ करना ही है। यदि आप एक पौधे को उखाड़ते हैं या किसी जोव की हत्या करते है या प्रकृति-चक्र में बाधा उत्पन्न करते हैं तो ये ‘लय भङ्ग’ का ही अपरा

लेखक सुघोष भारद्वाज-Sughosh Bharadwaj
भाषा हिन्दी
कुल पृष्ठ 94
Pdf साइज़5.5 MB
Categoryसाहित्य(Literature)

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