मनुस्मृति तुलसीदास – Manusmriti PDF in Hindi

मनुस्मृति तुलसीदास – Manusmriti Book/Pustak PDF Free Download

पुस्तक का एक मशीनी अंश

मायानंचाऽस मिच्छन्ति नवान्नामिपगर्दिन ||२८|| अग्निहोत्री ब्राह्मणादि दीर्घ आयु की इच्छा करने वाला नवीन अत्र से इष्टि किये बिना नवान्न मक्षण न करें और पशुभाग किये बिना मांस भक्षण न करे ||२७||

नवीन अन्न और पशु से यजन किये बिना अग्नि इनके प्रायों को खाने की इच्छा करते हैं क्योंकि अग्नि नवीन अन्न और मांग के अन्यन्त अमिलाय वाले हैं” ||

( इस प्रमङ्ग में पायाग का अर्थ पशु के घृतादि मे यथार्थ लेकर कोई लोग २६ वें का समाधान करते हैं परन्तु आगे २७ वे के अर्थ बार में मांग का वर्णन आने से स्पष्ट जान पड़ता है कि यह लीला हिंसकों की है।

यज्ञ देवकार्य है और मनु एकादशाब्याय में माम देव भाजन नहीं किन्तु राक्षसी वा पैशाच भोजन कहेंगे। इसलिये ये श्लोक हमारी सम्मति में मनु के विरुद्ध होने से प्रचित हैं ||२|

नास्य कश्चिद्वसद्गैहे शक्तितोऽनर्चितोऽनिधिः ॥२६॥ हंतुकान्वकवृत्तींश्च बाङमात्रेणापि नाचम् ||३०|| आसन भोजन शय्या जल मूल वा फल से थाशक्ति बिना पूजन किया कोई अतिथि इस (गृहन्थ) के घर में न रहे ||२९||

परन्तु पाखण्डी और निषिद्ध कम करने वाली विडालनन वालों शठों वेद में श्रद्धा न रखने वालों और वक्रवृत्ति वालों को बाणी मात्र से भी न पने शक्तितोऽपचमानेभ्यो दातव्यं गृहमेषिना । संविभागश्च भूतेभ्यः कर्तव्योऽनुपराषतः ||३२||

वेद विद्या की नमामि करने वाले और व्रतको सम्पूर्ण करने वाले तथा श्रोत्रिय गृहस्थों की इज्य फव्य से पूजित करे और इन से विपरीतो को नहीं ||३१|| गृहस्थ यथाशक्ति पाक,

न करने वाले ( सन्यासी वा ब्रह्मचारी ) को भिक्षा देने और सम्पूर्ण जीवों को बिना रुकावट के जलादि भाग देवे ||१२|| राजता घनमन्विच्छेत्मंमीदन्नातकः क्षुषा । याज्यान्तेवासिनोर्वापि नत्वन्यत इति स्थितिः ||३३||

न सीवेत्स्नातको विप्रः क्षुधाशक्तः कथंचन् । न जोमलचंद्रामा भवेच्च विभवे सति ||३४|| क्षुधा से पीडित स्नातक राजा से और यजमान वा शिष्य से द्रव्य की इच्छा करे अन्य से न मांगे। इस प्रकार शास्त्र मर्यादा है ||३३||

स्नातक ब्राह्मण चूवा से पीडित कमी न रहे और धन पास होने पर पुराना मैला वस्त्र न रक्खे ||३४|| क्लृप्तकेशनस्खश्मश्रुर्दान्तः शुक्लाम्बरः शुचिः ।. स्वाध्याये चैवयुक्तः स्यान्नित्यमात्महितेषु च ॥३५॥

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लेखक तुलसिदास-Tulsidas
भाषा हिन्दी
कुल पृष्ठ 680
Pdf साइज़37.5 MB
Categoryधार्मिक(Religious)

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