मानव एवं आर्थिक भूगोल | Human And Economic Geography PDF In Hindi

आर्थिक भूगोल – Human And Economic Geography Book/Pustak PDF Free Download

किताब के पाठ

अध्याय 1 : पृथ्वी के प्रमुख साधन

साधनों की परिवर्तित संकल्पना, साधनों का वर्गीकरण, जीवीय और आजीवीय साधन, समाप्त और असमाप्त होने वाले साधन, संभाव्य और विकसित साधन, कच्चेमाल और ऊर्जा के साधन, कृषि और पशुचारणिक साधन, खनिज एवं औद्योगिक साधन

अध्याय 2: प्रमुख साधनों का संसार में वितरण

वन-साधन, वनों के मुख्य प्रकार–उष्ण कटिबंधीय वर्षा वन, शीतोष्ण कटिबंधीय पर्णपती वन और कोणधारी वन, वन समस्याएं, मत्स्य-साधन, प्रमुख मत्स्यन क्षेत्र, भारत में मत्स्य उद्योग, खनिज साधन, लोहा, तांबा, अल्यूमीनियम, कोयला, विश्व के प्रमुख कोयला क्षेत्र, पेट्रोलियम, संसार के प्रमुख ल क्षेत्र यूरेनियम, थोरियम, जलसाधन

अध्याय 3 : साधन-आधार उत्पादन संकुल एवं साधनों का संरक्षण

यूरोप के उत्पादन संकुल, उत्तर अमेरिका के उत्पादन संकुल, सोवियत संघ के उत्पादन संकुल, एशिया के उत्पादन संकुल, दक्षिणी महाद्वीपों के उत्पादन संकुल, साधनों का संरक्षण, संरक्षण का महत्व, संरक्षण की प्राचीन विधियां और संरक्षण का आधुनिक इतिहास, मृदा का संरक्षण, जल और वायु का संरक्षण, वनों का संरक्षण, वन्य प्राणी और मत्स्य का संरक्षण, खनिज साधनों का संरक्षण, लौह अयस्क का संरक्षण, मानवीय साधनों का संरक्षण

आपाप-प्रयाग राष्ट्रीय मारहाणीत भए बाम काम चाहिए। श्री आत बदि एवं विशिष्ट भाविक पियानो के बीच देशमुख्याः प्रामाणिक जापान कहे गाल बना कभी दम विर होने का बाना नही इनकीतूं की आपगता होती है।

अतः अनेक देश की मायावताओं की त देण बुः मीनिक जापादों का बाचाड अए अपों के भौचर होता थापण र वित्तं दश क भान का भारत विकासपीला आवश्यक है

इसके अतिरिक्त देश अपने गांव- देश हैं। बवाय अन्य संख्याओं की अतिरिक्त उत्पादन मना सके विपरीत यूनाइटेड किंगडम एक विस्तव।

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इस देशों की पुरुषमा कविता की शिकार हो थाहै| और देशों में प्रचुर मात्रा में कच्चा माल भावात मारणा पता ही भारत ब्रिटेन के समाग जीजीनिय देश हो है

और सबसे में कर दे अपने खेतों चरा रही, ी बालों पर काम करने और अपनी व्य कता के लिए अब उससे औद्याईगिक उत्पादों से स्वर्धा करने केगा।

कुओं का निर्माण कने के लिए विविध प्रक की अशी बोडोमिक देशों से खरीदने हैं।

राष्ट्रीय व्यापार का अमुख आषार नी बर्तुओं से बंतर्ट्रीय वाजार मरे पड़े पाचन, भीग उत्पादन बीमा पाए पनि निमित्त मात्र डर से जवाई रार्थ जापान तो खुशियों पूर्व भारत वालों के करकरणी कामायास करता था |

लेखक हुसैन माजीद-Husain Majid
भाषा हिन्दी
कुल पृष्ठ 234
Pdf साइज़11.9 MB
Categoryभूगोल(Geography)

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