महर्षि कुल वैभवम | Maharshi Kula Vaibhavam

महर्षि कुल वैभवम | Maharshi Kula Vaibhavam Book/Pustak Pdf Free Download

पुस्तक का एक मशीनी अंश

वर्तमान शताब्दी के प्रारम्भ में बेदार्थ का मनन करने वाले महानुभावों में जयपुर के स्व. पं. मधुसूदनजी ओमा का अपना विशिष्ट स्थान है। उनको वेद-विज्ञानवाद की दृष्टि उनके द्वारा किये गये

लेखन में प्रभूत रूप से हुई है पं. मोझा के इस प्रकार के लेखन को प्रकाशित रूप में विद्वानों तक पहुंचाया जाय इस बाशय से प्रतिष्ठान ने अपने प्रारम्भिक वर्षों में ही उनके ग्रन्थों को करने की योजना बनायी थी

तदनुसार महर्षिकुलवैभवम् को पं. प्रोझा के ज्येष्ठ शिष्य महामहोपाध्याय स्व. गिरिवरशर्मा चतुर्वेदीजी से सम्पादित करवा कर मुद्रित किया गया था ।पिछले कुछ वर्षों में राजस्थान पत्रिका के संस्थापक-संपादक

श्री कपूंरचन्द्र कुलिशजी ने पत्रिका के माध्यम से जहां जन सामान्य का ध्यान इस मोर माकृष्ट किया वहां प्रतिष्ठान ने १६६१ व ९२ में पं. अोझा की वेदष्टि और उनकी सारस्वत साधना पर दो राष्ट्रीय का प्रायोजन कर

वैदिक शोध-जगत् को पोकाजो विरचित साहित्य के अ्रध्ययन प्रेरित किया । उसके बाद तो राजस्थान में अनेक स्थानों पर ओझा-साहित्य की चर्चा व अध्ययन के लिये अनेक सेमिनार और भायोजित हुई।

राजस्थान सरकार ने जोधपुर विश्वविद्यालय में संस्कृत विभाग के अन्तर्गत पं. मधुसूदन मोझा शोध-प्रकोष्ठ की स्थापना कर वेदाध्ययन का मार्ग और अधिक प्रशस्त किया ।

प्रकोष्ठ के द्वारा भी पं. प्रोझा के कतिपय ग्रन्थ प्रकाशित हुए हैं और यह और भी उत्साहवर्षक प्रगति हुई कि राजस्थान के विश्वविद्यालय के संस्कृत के पाठ्यक्रम भवम् प्रमुख है।

प. पोझा अतः विद्वानों और शोधार्षियों को वह पुनः सुलभ हो सके इस दष्टि से उसका पुनमु द्ररण का कार्य इस वर्ष हाय में लिया गया। पुनरमु द्वित रूप में भापके हाथों सौंपते हुए हमें अव्यन्त प्रसन्नता हो रही है।

लेखक गिरिधर शर्मा चतुर्वेदी-Giridhar Sharma Chaturvedi
भाषा हिन्दी
कुल पृष्ठ 507
Pdf साइज़23.4 MB
CategoryReligious

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