लक्ष्य अब दूर नहीं | Lakshya Ab Door Nahi

लक्ष्य अब दूर नहीं | Lakshya Ab Door Nahi Book/Pustak Pdf Free Download

पुस्तक का एक मशीनी अंश

अतएव भगवान्की प्रा्िमें भविष्य नहीं है हमलोगोंकी भावनामें ही भविष्य है।इस विषवमें एक बात विशेष महत्वकी है कि संस्करके कितने भी काम है, सब के सब बनने और बिगड़नेवाले हैं।

बननेवाले काममें देर लगती है, परन्तु बने-बनाये (विद्यमान) काममें देर कैसे लग सकती है? परमात्मा भी विद्यमान हैं और हम भी विद्यमान हैं। उनके और हमारे बीय देश काल गालीदनका कोई भी नुकसान नहीं है

फिर [चरमात्माकी प्राप्तिमें देर क्यों लगनी चाहिये ?भगवान सब समय में, सब देश ( स्थान ) – में सय वस्तु ओंमे तथा सब प्राणियोंमें विश्वमान हैं। समय, देश, वस्तु, प्रोमो आदि सथ-के सब बदलरेवाले हैं.

अ्धात् निरन्तर नहाँ रहते । इसके दैपरोत हम (स्वयं) भी निरजर रहनेवाले हैं और भगवान् भी ऐैसे भगवान् को प्राप्त करने के लिये हमने सो धारणा बना ली है कि अब संसारका कोई साधारण काम भी शीघ्र नहीं हौता, है

जो सबसे महान् हैं, रन भगवानकी प्रालिका कार्य शोघ्र कैरो हो जा ? परन्तु वास्तव में सबसे कियी बस् सबसे सहज सुलभ भी होती है । र सबके लिये हैं और सबकी पर हो सकते हैं। स्वयं हमने ही

भाषा की प्रामिमें आग लगा रखी है कि वे बत्यानो पुरुषोंको मिलते हैं. रम गरहस्थियेंकी कैसे मिलेगे ? से जंग रहनेवालोंको मिलते हैं हम शहरमें २हनेवालमोको कैसे मिल?कोई अच्छा गुरु वहाँ मिलेंगे तो भगवान्

किसे मिले कोई बहिननहीं करणे तो भगवान कैसे मिलेंगे? आजकत भगावत्यानिका मर्ग बनवाने कोई अच्छे महात्मा भी नहीं पहे नो हमें भगवान कैसे मिलेना हमारे भाग्यम ही नहीं है तो भगा कैसे मिलेंगे?

हम तो अधिकारी ही नहीं है हो भागवाहयें कपे मिलेंगे / इनारे कर्म से ऐसे नाही तो भगवान हमे को मिलेगा ? इस प्रकार आने कितनी आ समने स्वयं

लेखक रामसुख दास-Ramsukha Das
भाषा हिन्दी
कुल पृष्ठ 81
Pdf साइज़37.8 MB
Categoryप्रेरक(Inspirational)

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