कुमारस्वामी का भारत चिंतन | Kumaraswami Ka Bharat Chintan

कुमारस्वामी का भारत चिंतन | Kumaraswami Ka Bharat Chintan Book/Pustak Pdf Free Download

पुस्तक का एक मशीनी अंश

दो -एक महीने पहले का समय देकर कुमारस्वामी जैसे गहन चिंतन करने वाले व्यक्ति के ऊपर कुछ कहना एक ऐसी स्थिति है जिसे यातना की स्थिति ही कहना

उचित होगा कई रातों से कुमारस्वामी को पढ़ रहा हूँ और बहुत भरा हुआ हूँ कुमारस्वामी से, लेकिन उतना भरा होकर भी कह पाना बड़ा कठिन लग रहा है। उनके विषय में कुछ कहने के पूर्व

एक रेखाचित्र प्रस्तुत करना चाहूंगा कि यह आनन्द कुमारस्वामी थे कौन, क्या थे उनके संकल्प ?कुमारस्वामी का जन्म श्रीलंका में हुआ पिता तमिल मूल के हिन्दू थे.

धड़े प्रबुद्ध, शायद उस जमाने में बैरिस्टरी करने वाले कुछ थोड़े से भारतीयों में से स्वयं पाली के बड़े अच्छे विद्वान् थे। दो वर्ष के कुमारस्वामी थे तभी उनकी मृत्यु हो गयो ।

माँ ब्रिटिश वो वे इन्हें ले गयों| सारो शिक्षा-दीक्षा प्रारंभ से लेकर विश्वविद्यालय तक इंग्लैंड में हुई और भूगर्भ-शास्त्र में इन्होंने एम०एस-सी० की। उसके बाद श्रीलंका आये.

वहाँ भूगर्भ सर्वेक्षण के निदेशक हुए खोज मिट्टी के भोतर से शुरू की और उस क्रम में इनाने भारत का भ्रमण किया और जिस चौज ने सबसे पहले पश्चिम में दीक्षित अत्यन्त विकसित

अन्तश्चेतना वाले व्यक्ति को आकृष्ट किया वह वस्तु थी भारतीय शिल्पी की साधना। जिस किसी हस्तशिल्प को उन्होंने देखा और उसने कौशल को देखा, वहाँ उन्होंने पाया कि आद्योगिक संस्कृति में कितनी दरिद्रता है

इस संस्कृति में कितनी सम्पन्नता है इस सम्पनता से यह पहला परिचय एक गहरी खोज का बीज बना। भारत घूमते समय वह एक-दूसरे जागरण से परिचित हुए। यह जागरण था स्वदेशी का यह समय बोसवीं शताब्दी के प्रारम्भ का था।

लेखक विद्यानिवास मिश्र-Vidhyanivas Misra
भाषा हिन्दी
कुल पृष्ठ 15
Pdf साइज़4.7 MB
Categoryसाहित्य(Literature)

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