काव्यधारा | Kavyadhara

काव्यधारा | Kavyadhara Book/Pustak Pdf Free Download

पुस्तक का एक मशीनी अंश

समय अनन्त है, यदि मान नहीं तो निल सत है। इन दो कारणों से भवभूति बहुत धाश्याला था। उसे अपनी प्रतिभा में विश्वास था। किन्तु पाजतक लिखे जाने वाले अगाशित काव्य नामक पों में से केवल कुछक ही छंट कर गर या सके ।

इससे यह सिद्ध है कि पृथ्वी की विशालता और समय की बगन्तला भी प्रत्येक कवि लिए सहायक नहीं होती, केवल प्रतिभाशाली ही यह सम्मान पा सकते है । अतः वहाँ तक युग-युग का प्रश्न है शाम के पालोचक पौर विचारक को भयभीत होने की बावायकता नहीं

क्योंकि जिन रच- नामों से धान यह शुन्य है, मे सम्भवतः काल पर विजय नहीं पा सकेगी, समय अपनी तराजू जन्हें सोचकर बोथा सम्मान कर एक थोर कंक देगा ।पर, मालीपक और विचारक अपने गुग में भी रहता है, और ममा के सृजन कर्म से उसका और उसके दायित्व का पविष्ट सम्बन्ध है।

यह पुण को समझना चाहता है, अपने युग को सम्भाला हमारेसना चाहता है, और उसे सम्भालने की और भी प्रयत्नशील रहना चाहता है-फिर बह पह भी सोचता है कि यह ऐसे युग में ही जन्म लेने याला विद्ध हो जिसमें उपच प्रतिभाएँ हुई है।

क्यों न उसको अपने पुण में ही कालिमामा-मोकापीयर में पीजी प्रतिमाएं वापस हों जो हाल-पत्र में पिछ मशक, माइल के चंगुल से बची रहें । मालोचक तथा विधारक को ये सभी भावनाएं महत् है, इसी लिए वह अपने बू का पर्यवेक्षण करता है। इस पर्षयेकरा से उसे विचित होता है कि गायनोत्र

में क कोई भारी म, प्रभाष या असमर्थता है। प्रतीत होता है कि इस क्षेत्र में प्रय अम अवषय है। वर्तमान काल में इसने विवाद और बाद है कि अम होवा अरवानाविक बही ।यरी मौलिक अम काणय के विय में यह है कि यह रूप’ (कार्य) की महत्त्व रे मा बस्नु’ (मेटर) को ही या दोनों को समन्विता र तथाको महत्व है या साप को, या

लेखक शिवदान सिंह चौहान-Shivdan Singh Chauhan
भाषा हिन्दी
कुल पृष्ठ 22
Pdf साइज़13.8 MB
Categoryसाहित्य(Literature)

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