कविवर बनारसीदास जीवनी | Kavivar Banarsidas Jivani

कविवर बनारसीदास जीवनी | Kavivar Banarsidas Jivani Book/Pustak Pdf Free Download

पुस्तक का एक मशीनी अंश

“मुगलोको पिछलो गण्तान बहुत कुछ नष्ट हो चुकी थी। शिक्षाको कमी भोर असभ्य समाजके कारण उनका पतन हो गया था असयम तथा मद्यपानने उन्हें अवनति गतमै पोक दिया था।

देश में स्थित प्रत्येक वर्गके लोग घोर लन्धकारमें पमे हुए पे । (नि्षन और धनवान् प्रत्येकके जीवनका प्रत्ये क वार्य ज्योतिषफे बनुमार ही होता पा पा्मिक युरुयो- की इतनी भक्ति होती थी

उनकी मृत्यु के पश्चात उनके स्मारकोरकी भी पूजा की जाती थी । अग्पविश्यास बोर अग्या ्सरण यदि मनुष्यफो वियेषा-धुद्धिको एतप्रन पर दे तो माहचर्य ही यया है।

वास्तवमें जनताके साधारण व्यवितम में कर सम्म ट् पर्मन्त सभी को अपने पुरुपत्वको अपेकद्षा भाग्य ( देरी शयित ) पर अधिक विस्याम था । यदि मुगल युगको एक दृष्टिने धामिय

अनि्विश्वागोका चुग पहा जाये तो अनुनित भी न होगा, यद्यपि धामिक एयर मो- समन्वयचे प्रयत्न गो चल है ये | गायपन्यियो- कা, दोबी फनफटे नथा निायत स घुओपा, मूकियोग,

तान्यिषोका और सदते बद़्दवर देव्री चगरगरौया जनतापर अटूट प्रभार था। हमारे प्रस्तावित कविषर यनारीदासपर नी अगेक घर्मो सम्प्रदायो परम्मगजो, साधिक क्रियानी तथा यन्पविदवायोा प्रभाव १ा

पा, जिसका उन्हें बादमें पर्याप्त परचात्ताप भी करा पटटा । पदिपे निजी जीवनकी एक घटनामे तत्कालीन अग्यविदयासोपना परिचय मिल जायेगा । सवत् १६५९ में एक साथ ने नबक एक मंकी आश्चर्य र्ण प्यार मुनाया।

उस मन्यरी एना वर्षको सिर्दिक पश्चात् एक दीनार प्रति दिन द्वारपर पही मिठा करेगो यह नो कहा । बनारसोदासजीने तत्काल साधुके चरण पकड लिये और मन्य लित लिया ।

एक वर्ष वडी श्रद्धासे मन्त्रका जाप किया परतु अन्तमें जय तुछ न मिला तो बटे दुर हुए। परवालोने सममाया वास्तवमें जनताके साधारण व्यवितम में कर सम्म ट् पर्मन्त सभी को अपने पुरुपत्वको अपेकद्षा भाग्य ( देरी शयित ) पर अधिक विस्याम था ।

लेखक रविन्द्रकुमार जैन-Ravindrakumar Jain
भाषा हिन्दी
कुल पृष्ठ 378
Pdf साइज़8.1 MB
Categoryआत्मकथा(Biography)

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