ज्योति पुंज | Jyoti Punj

ज्योति पुंज | Jyoti Punj Book/Pustak Pdf Free Download

पुस्तक का एक मशीनी अंश

सरोदर सरसा एक रजत किरण मुस्काई, कलियों ने यूँबट खोला ले गौवन की अण्णाई । विखरी अलसाई कुमकुम से करती बातें, हमने ‘रिसाने किस को हेपर मन भी सौगातें । अनशन बना अपने के जवनों का राजा बचपन, नगर पा स्वीकार रहा था नव-जीवन का आामनम ।

यह केसी संनल:1 थी स्वनिल सरला आँखों में, मौत भावनाओ में । कोल प मे कल रिम गुमान करा मा मानों प्रतिपन अभिनन्दन।सरसिज का मधुर बासित इसहसा उठा अपने में, मधुपों की गुन गुग गुंबन इठलाई स्वर मरने में ।

शव पूरित आंगन में यौवन उभार से आया एक मधुर रागिनी छेड़ो कौतूहल सजग सहरी देह पर शोभित मा खेत बसन रेशम का सिमटी सिमटी सी बोर्ड पहरा देती अँचत का । मखमली पास उपवन की पण छूने को ललचाई, तुवर की रुनझुन कहती बजने दो पहनाई।

तत् शत् कमलों का वैभव ठित कमला चरणों पर, सपनीमा बाम गाथा धसी की वी एक रेखा । मतवाली सून पी बी जागरण कान्ति की रेखा । हँसती थी मुस्काती थी सकुचाती सरन सजीली , अखियाँ भरली अंजुरी में देखें ना ससी छत्रीती। मथुशतु के साज सजाती

फिर एक पंचमी आई, सिंगार: सजाने सन् ‘सोलह” की तिथि आई । सोलह रतिनाथ स्वयं हरषाया किसलय किसलय में लाली, कमनीय कान्त कोमल रव बिखराता भर भर प्याली । मन माणिक ने पाया था अपना प्रिय आज जवाहर , सिन्दूरी माँग विहंसती

पौवों में रचा महावर। श्वेतांचल अरुणांचल में जाँसू पीकर गुस्वाबी सावना बना जीवन कब । डाली भवन मुस्काया नन्दनकानन डाली हरवाई था फूलों में रंग ऐसा। बेटे ने सेहरा बाँचा सपने अरमान सजे *मोती’ के , साकार बने थे घरनी ‘सरूपरानी’ के ।

साड़ियाँ अशर्फी माला चूड़ी बोटी जाती थीं, सब दास दासियाँ प्रमुदित सखियाँ गाने गातीं थीं। लहरों में कल कल करता गंगा जमना का पानी,ओ मेरे लाल अमर हो मुस्काये सदा जवानी । अक्षत शैली का टीका पगड़ी में लाल लगे थे . स्वर्णिम पट पीत वसन से

लेखक श्रीमति प्रतिभा गर्ग-Srimati Pratibha Garg
भाषा हिन्दी
कुल पृष्ठ 142
Pdf साइज़6 MB
Categoryकाव्य(Poetry)

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