जवाब दर सवाल | Jawab Dar Sawal

जवाब दर सवाल | Jawab Dar Sawal Book/Pustak Pdf Free Download

पुस्तक का एक मशीनी अंश

तुम्हारे हाथ पत्थरों की तरह संगीन हैं जेल में गाए गए गीतों की तरह उदास हैं बोझा ढोने वाले पशुओं की तरह सख्त हैं, सख्त हैं, सख्त हैं तुम्हारे हाथ भूखे बच्चों के तमतमाये चेहरों की तरह है

तुम्हारे हाथ मधुमक्खियों की तरह दक्ष हैं ये जहां तुम्हारे हाथों पर नाचता रहता है, ये जहां तुम्हारे हाथ आ मेरे लोगों आ मेरे लोगों यूरोप के लोगों अमरीकी लोगों सारी दुनिया के लोगों,

तुम सतर्क हो, हिम्मती हो फिर भी अपने हाथों की तरह खोये हुये हो फिर भी तुम पर बसी बनाये जाते रहे हो तुम्हारे हाथ .आ मेरे लोआ मेरे लोगों एशियाई लोगों अफ्रीकी लोगों

मध्य पूर्व के लोगों मेरे अपने देश के लोगों तुम अपने हाथों की तरह घिसे हुए कठोर हो तुम अपने हाथों की तरह तरोताज़ा युवा हो आ मेरे लोगों तुम्हारे हाथ कोई अपनी खुशी के लिए गैर की रोटियां

छीन ले हम नहीं चाहते छींटकर थोड़ा चारा कोई उम्र की हर खुशी बीन ले हम नहीं चाहते हो किसी के लिए मखमली बिस्तरा और किसी के लिए एक चटाई न हो। इसलिए राह …

अबातमन्नायें फिर न करें खुदकुशी ख्वाब पर खौफ की चौकसी न रहे श्रम के पावों में हो ना पड़ी बेड़ियां शक्ति की पीठ अब ज्यादती ना सहे दम ना तोड़े कहीं भूख से बचपना रोटियों के लिए

फिर लड़ाई न हो। इसलिए राह हो गई है पीर पर्वत सी पिघलनी चाहिए, इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए। आज यह दीवार, परदों की तरह हिलने लगी, शर्त लेकिन थी कि ये बुनियाद हिलनी चाहिए।

हर सड़क पर, हर गली में, हर नगर, हर गांव में, हाथ लहराते हुए हर लाश चलनी चाहिए। सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं, मेरी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए।

लेखक
भाषा हिन्दी
कुल पृष्ठ 94
Pdf साइज़47.6 MB
Categoryकाव्य(Poetry)

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