जलस्थिति जलगति और वायुकतत्त्व | Jalsthiti Jalgati Aur Vayukatattv

जलस्थिति जलगति और वायुकतत्त्व | Jalsthiti Jalgati Aur Vayukatattv Book/Pustak Pdf Free Download

पुस्तक का एक मशीनी अंश

नियम सेवि निर्गत जल का जिनका वेग दोना चाहिये, व्यवहार मे बिर के बाकार और चौड़ाई के हारा ऊम बकर आजाना है, कोंकि व धीर धारों की परस्पर टक्कर से जल का ऊचा निरोध होता है।

हिसाब लगाया गया है कि जल मे बीई बरूयर अथवा जलाधार की नली या पायथ पर य- कवर्गरम का दबाव मति रो फ़ट गइराई माय एक पौए वा बाधसेर है। समुद्र में का एव एज बकरबद्धन गहराई मे यईच जाने से ऊपर के

दवाब से उसमे जल इतना भर जाता है कि उसकी इता जानी रहती है और बद समरको जीमेल २या रहता है। एक बोतल के मुखको रूप कार्क से बन्द करके और उसपर लाख की महो।

गाकर सदमे यदि वहन गहरा बोया जाय तो याना कार्क जल के दबाव से बोनस के भीतर असु जायगा या बोतल इट जायगी। अमित याद सहस मध्य इव (बर्थोद ५ सदस इ) के नीचे जल अपर की पेता बीसवां वेश बाधिक ना है।

५। उनसे सम नल व समस्या देना जल का चौ- चा गण है। जल के यरमाए जो मे परस्पर कये न होने से वे कला २ वरुण की न्या ई एफ यावड ने होने, मन बड़ी मगमता के साथ पक हमरे के चारों ब्रोर गनि करने हैं ।

इसी देत शिस यात्रा में से रकर जाते हैं उसके भीतर वे सम्पूर्ण रूप से मवेश करते हैं, कोई स्थान शून्य नहि २ह ने याना, श्रीर ३ नकी राशि यात्र कोद२ का आकार धारण करनी दे। पर रु श है मन्पेक वरमाएज जदा] तक सम्भ व दो नीचे की ओर जाने की चेष्टा करना है,

लेखक नवीन चंद्र राय-Navin Chandra Rai
भाषा हिन्दी
कुल पृष्ठ 96
Pdf साइज़5.5 MB
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