जागृति | Jagriti

जागृति | Jagriti Book/Pustak Pdf Free Download

पुस्तक का एक मशीनी अंश

कई वर्षों की बात है, खियों में मातृभाषा हिन्दी का प्रचार करने वाली भारतीय सर्वश्रेष्ठ संस्था प्रयाग-महिला विद्यापीठ के उद्योग से प्रथम भारतवर्षीय स्त्री-कवि-सम्मेलन का आयोजन हुआ था।

इस सम्मेलन को सभानेत्री श्रीमती सुभद्राकुमारी चौहान थीं। उन सम्मेलन में लखनऊ से श्रीमती तोरनदेवी शुक्र ‘लली’ तथा स्वर्गीया श्रीमती रामेश्वरीदेवी मिश्र ‘चकोरी’ मी पधारी थीं।

उस अवसर पर अनेक कवयित्रियों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को आनन्दित किया । किन्तु जिन सजनों और देवियों ने उस अवसर पर ‘सनी’ जो की कविता का रसास्वादन किया वह आप की वाणी और कविता से अत्यन्त प्रभावित हुए।

इसके फलस्वरूप द्वितीय भारतवर्षीय स्त्री-कवि-सम्मेलन क सभानेश्री पद के लिए हिन्दी संसार में केवल ‘लजी’ जी ही की थोर लोगों की एकमात्र दृष्टि रही। अन्त में आपने अपने कन्धों पर यह भार वहन भी किया।

वैसे तो काव्यरसिक पचीसों वर्षों से आप के काव्य का रसा स्वादन करते चले था रहे थे, किन्तु हिन्दी संसार को इन सम्मेलनों में ‘लली’ जी का परिचय प्राप्त कर अत्यन्त सन्तोष और गर्म हुआ।

‘बली’ की जन्म जात कवयित्री है। मैं इस बिज्ञासाको मा के लिए- कि किस प्रकार हिन्दी संसार को वह अमूल्य निधि प्राप्त हुई – विशेष रूप से उत्सुक था। मुझे अवसर भी प्राप्त हुआ।

जीवन वार्ता सुनने के लिए कर्वायत्री जी के पिता जी का आश्रय लेना पड़ा। उनसे मिलते ही उनके व्यक्तित्व की मुक्त पर गहरी छाप पड़ी। उनकी जिन्दादिली और मिलनसारी सराहनीय है।

‘लली’ जी के पूर्वज दिलवल जिला उखाव निवासी थे। यह स्थान अजगैन के पास है। सन् १८५७ ई० में आप के पितामह स्वर्गीय पं० जानताप्रसाद तिवारी अपनी और अपने साले स्वर्गीय पं० रामप्रसाद जी के साथ प्रयाग थाये।

प्रयाग के निहाजपुर मुहल्ले में रहते हुए आप ने धन और यश दोनों प्राप्त किये। यहीं हमारी कवयित्री जी के पिता पं० कन्हैयालाल विवारी का जन्म हुआ। पं० कन्हैयालाल जी तिवारी चार० एम० एस० में कार्य करने के पश्चात् इस समय पेन्शन पा रहे हैं।

लेखक तोरण देवी शुक्ल-Toran Devi Shukla Lali
भाषा हिन्दी
कुल पृष्ठ 154
Pdf साइज़2.3 MB
Categoryकाव्य(Poetry)

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