जड़ विज्ञान तत्त्व | Jad Vigyan Tattva

जड़ विज्ञान तत्त्व | Jad Vigyan Tattva Book/Pustak Pdf Free Download

पुस्तक का एक मशीनी अंश

कैसा चाहनेहै वि गुरुनव न नेचा गपसना बांद केर्ई के बना हमारी इस मार्यना के इस बड़ी विपकपड़े सरुववत के न न से यूपी का बैग ो न रहे र क हाही मी विनायन के च सके, यस्तयारम ऊपर बिनो वहीं रह जायें, ग्रैम संभव है कि इस शथी केि भी सर्वथा छोड़ सकें ।

हमारे घर की चीजें कुछ यरती पर और कुछ छनपर ग्रेश कुछ इधर उथर उड़ती फिरें और हमशन के अंदर की तल पर उसी मकार चलते फिरने जे स की रानी पर बरार चोट भी पृथ्वी के साथ सेवन्ध न रहने के कारण हमें के ?

भागता, प्यार कभी लारकर न गरा ता और इसी प्रकार पृथ्वी भी सूर्य के साथ सेबन्ध नरबने के कारण उसको झोर तारों में निकल नानी ।इतना गुरुवबल का दिना ने । खब दम रगखते हैं कि यरि गरायवल नदेशा ते। करा दो ता यरि यह बन न रोजा ते।

करिन पदार्थ के परमाणु परस्पर जड़े नरहते कि ना ही गिर पड़ते । हमारे चरों की मेज़ चा की चर्वाटी जाती, ग् मारे चले की भी यही दशा है।ती, इस प्रकार नहमाचररहता औरन कोई वर का पदार्थ ई के मलयदर् विलने हे मिल्रमवर्ड उ ह, किया समभग मुलपयाी के निनमेंन से थान मर बोड़े सेमास हैं,

रहजाते । संसार में मांत मा की बलनहोनी, रजीना भी कडिनोमा गकि हमारे शरीर भी मिन, और यदि रसायनिक संयोग न होजाय तो उनका एक अंश वायमें उजाय, और हमय श्री जे। बहुत से कार्बन बेड़े फास्केरस ब्रेश बक [दे। यात सेवनाहै, इर्वी पर गिरयड़े श्रा इस प्रकार हमा- रात हेजाय । डोरसवानके लिये हम इस लाहे की चादर को एक धागे से लटकाते हैं।

लेखक हरिकृष्ण दास-Harikrushn Das
भाषा हिन्दी
कुल पृष्ठ 192
Pdf साइज़20.9 MB
Categoryभूगोल(Geography)

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