हिन्दू परिवार मीमांसा | Hindu Parivar Mimansa

हिन्दू परिवार मीमांसा | Hindu Parivar Mimansa Book/Pustak PDF Free Download

पुस्तक का एक मशीनी अंश

परिवार मानव समाज की एक महत्वपूर्ण संस्था है। समाज का संरक्षण और संवर्धन इस पर अवलम्बित है । इसकी महत्ता का अनुभव करते हुए वैदिक युग में शिक्षा समाप्त करने पर प्रत्येक स्नातक को आचार्य यह उपदेश देता था

प्रजातन्तुं मा व्यवच्छेत्सीः ( तैत्तिरीय उपनिषद् ११११११ ) अर्थात् सन्तान रूपी तन्तु का विच्छेद मत करो । हिन्दू समाज में मनुष्य का विकास उस समय तक पूरा नहीं समझा जाता था,

जब तक कि वह विवाह करके सन्तान नहीं उत्पन्न कर लेता था । इस पुस्तक में हमारे समाज की इस महत्व पूर्ण संस्था की वैदिक युग से वर्तमान काल तक की ऐतिहासिक और समाज शास्त्रीय मीमांसा का एक विनम्र प्रयत्न है।

इस में हिन्दू परिवार के अतीत का अनुशीलन, वर्तमान का चिन्तन और भविष्य का विवेचन है । यह पुस्तक दो भागों में विभक्त है। दसवें अध्याय तक पूर्वार्द्ध में हिन्दू परिवार के उद्गम और प्रयोजन तथा इसके विकास पर प्रकाश डाला गया है;

पति, पत्नी, पिता, माता, पुत्र, पुत्री, भाई, बहिन आदि सम्बन्धियों की स्थिति तथा आदर्शों का वर्णन है । ग्यारहवें अध्याय से हिन्दू परिवार के साम्पत्तिक और कानूनी स्वरूप का प्रतिपादन है ।

संयुक्त परिवार, उत्तराधि कार तथा बंटवारे के सामान्य सिद्धान्तों के ऐतिहासिक विवेचन के बाद पिता, पुत्र, पुत्री, पत्नी, और विधवा के साम्पत्तिक स्वत्वों के वैदिक युग आज तक के विकास की प्रक्रिया को स्पष्ट किया गया है ।

अन्तिम अध्याय में हिन्दू परिवार के भविष्य पर प्रभाव डालने वाले तत्वों की मीमांसा तथा भावी परिवार की रूप रेखा का वर्णन है, इसमें हिन्दू कोडबिल का तथा उसके बाद प्रस्तावित तथा इस समय लोक सभा में पेश किये गये

लेखक हरिदत्त वेदालंकार-Haridutt Vedalankar
भाषा हिन्दी
कुल पृष्ठ 782
Pdf साइज़77.8 MB
Categoryसाहित्य(Literature)

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